Alcohol Effects: दोस्तों के बीच अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग शराब के कुछ पैग लेने के बाद अचानक बोलने लगते हैं- “आज गाड़ी तेरा भाई चलाएगा!”… विशेषज्ञों का कहना है कि शराब का यह प्रभाव वास्तविक आत्मविश्वास नहीं, बल्कि मस्तिष्क में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं का नतीजा है।
शराब पीते ही मस्तिष्क के रिवॉर्ड सेंटर में डोपामाइन नामक केमिकल का स्तर बढ़ जाता है। यह ‘फील-गुड’ केमिकल व्यक्ति को अधिक ऊर्जा और शक्ति का अहसास कराता है। डोपामाइन के बढ़ने से इंसान को अपनी क्षमताओं का गलत आभास होता है और वह अपनी वास्तविक सीमाओं से परे आत्मविश्वासी महसूस करने लगता है।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की गतिविधि कम
मस्तिष्क का वह हिस्सा जो फैसले लेने, लॉजिक लागू करने और आत्म-नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालता है, उसे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स कहा जाता है। शराब इस हिस्से की गतिविधि को कम कर देती है, जिससे व्यक्ति जोखिम और सुरक्षा का सही आकलन नहीं कर पाता। यही कारण है कि नशे की स्थिति में लोग ऐसे फैसले ले लेते हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में वे कभी नहीं लेते।
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GABA का असर कम करता है डर और चिंता
शराब GABA नामक न्यूरोट्रांसमीटर के प्रभाव को भी बढ़ाती है। GABA मस्तिष्क को शांत करता है और डर या चिंता को कम करता है। जैसे-जैसे इसका असर बढ़ता है, व्यक्ति को अपनी झिझक और डर कम महसूस होने लगते हैं। यही वजह है कि कुछ लोग शराब पीकर बहादुर या असीम आत्मविश्वासी महसूस करने लगते हैं।
खतरे का आकलन कमजोर, जोखिम बढ़ जाता है
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शराब का असर मस्तिष्क की खतरे का आकलन करने की क्षमता पर भी पड़ता है। जो संकेत सामान्य स्थिति में सतर्क रहने के लिए चेतावनी देते हैं, नशे में उन्हें व्यक्ति मामूली या महत्वहीन समझने लगता है। इसी कारण शराब पीकर ड्राइविंग करना या जोखिम भरे काम करना खतरनाक हो जाता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, शराब भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को बढ़ा देती है और लॉजिकल प्रोसेसिंग को कमजोर कर देती है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति आवेग में फैसले लेने लगता है और अपने आसपास की वास्तविकता को सही तरीके से आंक नहीं पाता।
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