Delhi Blast: IED या RDX क्या होता है ज्यादा खतरनाक, किसके धमाके से होता है बड़ा नुकसान? जानें सबकुछ

Delhi Blast: IED या RDX क्या होता है ज्यादा खतरनाक, किसके धमाके से होता है बड़ा नुकसान? जानें सबकुछ

How Dangerous Is RDX: लाल किला के पास हालिया कार ब्लास्ट ने एक बार फिर यह सवाल उठा दिया है कि आमतौर पर जिन विस्फोटक पदार्थों का जिक्र होता है, जैसे RDX, TNT या अमोनियम नाइट्रेट वे किस तरह से अलग-अलग प्रकार का विनाश करते हैं। घटना के प्रारंभिक बयानों में अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की बात रही, वहीं कुछ रिपोर्टों में आरडीएक्स का नाम भी आया। यहाँ समझने वाली बात यह है कि अलग-अलग विस्फोटक भौतिक रूप से अलग व्यवहार करते हैं और उनके मानव जीवन, संरचनात्मक नुकसान और चिकित्सा परिणामों पर अलग प्रभाव होते हैं।

RDX क्या है और किसलिए जाना जाता है?

RDX (Research Department Explosive / Royal Demolition eXplosive) एक उच्च-शक्ति वाला समस्थानिक विस्फोटक है। सैन्य अनुप्रयोगों में इसे दशकों से उपयोग किया जाता रहा है क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से छोटे द्रव्यमान में भी उच्च ऊर्जा छोड़ता है। RDX की डिटोनेशन-वेग और ब्रिसेंस (शॉक-कारक प्रभाव) आमतौर पर TNT से अधिक मानी जाती है, इसलिए समान भार पर RDX का प्रभाव तीव्र और स्थानीय रूप से अधिक विनाशकारी होता है।

RDX छोटे पैकैट में भी तीव्र शॉक-वेव उत्पन्न कर सकता है, यही कारण है कि यदि किसी IED में RDX निहित हो तो आसपास के लोगों और संरचनाओं को होने वाला तात्कालिक नुकसान बहुत गंभीर हो सकता है।

अमोनियम नाइट्रेट: बड़े पैमाने पर विनाश

अमोनियम नाइट्रेट (AN) मूलतः उर्वरक है, पर विशेष परिस्थितियों में यह विस्फोटक के रूप में भी काम कर सकता है। AN की ऊर्जा-घनता RDX से कम होती है, पर यदि भारी मात्रा में उपयोग किया जाए और चार्ज को confinement (बंदी) दिया जाए तो विशाल भौतिक नाश पैदा कर सकता है, इसका इतिहास इस तरह की घटनाओं से भरा है।

निष्कर्ष: AN आमतौर पर RDX की तरह तेज़ ब्रिसेंस नहीं देता, पर बड़े द्रव्यमान में यह आसपास के ढाँचे, खिड़कियों व दीवारों पर व्यापक क्षति पहुँचा सकता है और आसपास का मलबा फैलाकर घायलों की संख्या बढ़ा सकता है।

TNT: परंपरागत मापक और तुलना का आधार

TNT को अक्सर विस्फोटकों की तुलनात्मक क्षमता का मापक (benchmark) माना जाता है। RDX आमतौर पर TNT की तुलना में अधिक ऊर्जावान है; कई सन्दर्भों में RDX-का प्रभाव TNT-के 1.3–1.6 गुणा तक बताया जाता है- सटीक अनुपात माप-प्रक्रिया और कंडीशन पर निर्भर करेगा।

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IED की मारक क्षमता किस पर निर्भर है?

किसी IED (Improvised Explosive Device) का विनाश-क्षेत्र केवल उसमें प्रयुक्त विस्फोटक के प्रकार पर निर्भर नहीं करता, निम्न बातों का मिश्रित असर तय करता है:

  • बंदी (confinement) — बंद कंटेनर में विस्फोट की तीव्रता खुली जगह से ज़्यादा होती है
  • फ्रैगमेंटेशन — आसपास रखे धातु-टुकड़े, बोल्ट, शीट आदि छर्रे बन कर घातक क्षति पहुँचाते हैं
  • टार्गेट-लोकेशन — भीड़-भाड़, बाजार, यातायात-सिग्नल, सार्वजनिक इमारतें आदि पर असर ज्यादा रहता है
  • ट्रिगर-मेकैनिज्म — रिमोट/टाइमर/मैनुअल ट्रिगर से आराम से प्लेस किए गए हमले समय पर अधिक विशिष्ट नुकसान कर सकते हैं

इन कारणों से कभी-कभी बहुत भारी-मात्रा का अमोनियम-आधारित चार्ज भी RDX-आधारित छोटे चार्ज से अधिक कुल विनाश कर सकता है- स्थान और आसपास की संरचनाओं के कारण।

RDX के कारण होने वाली विशिष्ट क्षति

RDX या अन्य उच्च-शक्ति विस्फोटक के प्रयोग से उत्पन्न प्रमुख प्रभाव आम तौर पर निम्न प्रकार के होते हैं:

तेज़-तरंग (blast wave) — तात्कालिक दबाव से लोगों के फेफड़ों और आंतरिक अंगों को चोटें पहुँच सकती हैं; “प्राइमरी ब्लास्ट-इंजरी” के रूप में इसे पहचाना जाता है।

फ़्रैगमेंटेशन-घायलों (secondary injuries) — विस्फोट के साथ उड़ने वाले मलबे या जो धातु शामिल हों वे छर्रों से घातक घाव कर सकते हैं।

संरचनात्मक क्षति — दीवारें, खिड़कियाँ, वाहन आदि तुड़पकर मलबा बन जाते हैं जो और ज्‍यादा चोटों का कारण बनते हैं।

शॉक-वेव का स्थानिक प्रभाव — बंद स्थानों में रिफ्लेक्शन से प्रभाव बढ़ जाता है।

चिकित्सा-परिणाम: सन्नाटा-अनुभव, कान फटना/श्रवण हानि, फेफड़ों में एयर-लिकेज/पल्मोनरी ब्लास्ट-इंजुरी, आंतरिक रक्तस्राव, और फ्रैक्चर/काट-छिलने पर संक्रमण जैसी जटिलताएँ सामान्य रहती हैं।

फोरेंसिक जाँच और पहचान कैसे होता है?

फायर-साइंस और फोरेंसिक टीमें विस्फोटक अवशेषों (residues), फ्रैगमेंट नमूनों और रासायनिक विश्लेषण के जरिए यह निर्धारित करती हैं कि किस प्रकार का विस्फोटक उपयोग हुआ। साथ ही CCTV फुटेज, वाहन-रीजिस्ट्रेशन, मोबाइल-लॉग और डीएनए-मिलान जैसे डिजिटल/जैविक तरीके संदिग्ध की पहचान में सहयोग देते हैं।

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