Valentine’s Day: भारत को अक्सर प्यार, रोमांस और कामसूत्र जैसी परंपराओं के लिए जाना जाता है, लेकिन आज की तेज़ रफ्तार और डिजिटल ज़िंदगी में रिश्तों की तस्वीर कुछ बदली हुई दिख रही है। वैलेंटाइन डे से ठीक पहले जारी हुई Ipsos की “लव लाइफ सैटिस्फैक्शन सर्वे 2026” रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टनर के साथ संतुष्टि के मामले में भारत दुनिया के 29 देशों में नीचे से तीसरे नंबर पर है।
इस सर्वे में लोगों से उनके प्यार, रिश्तों और निजी जीवन को लेकर संतुष्टि के बारे में सवाल पूछे गए। नतीजे बताते हैं कि दिखने वाला रोमांस और असल ज़िंदगी का अनुभव कई बार एक जैसा नहीं होता।
जितना रोमांस दिखता है, उतनी संतुष्टि नहीं
इस रिपोर्ट में लव लाइफ सैटिस्फैक्शन को तीन बातों के आधार पर परखा गया:
- अपने जीवन में मिले प्यार से संतुष्टि
- रोमांटिक और निजी रिश्तों से संतुष्टि
- पार्टनर या जीवनसाथी के साथ रिश्ते की स्थिति
इन पैमानों पर भारत का स्कोर दूसरे देशों के मुकाबले कम रहा। मतलब यह कि रिश्तों में होने के बावजूद कई लोग भावनात्मक रूप से उतना संतुष्ट महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
कौन रहा सबसे आगे?
इस सर्वे में Thailand पहले स्थान पर रहा। वहां के लोगों ने अपने रिश्तों, रोमांटिक जीवन और निजी संतुष्टि को लेकर सबसे ज़्यादा खुशी जताई। एशिया, लैटिन अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों ने भी अच्छी रैंक हासिल की, जहां लोग अपने रिश्तों से ज्यादा संतुष्ट नजर आए।
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किन देशों की स्थिति कमजोर रही?
रिपोर्ट के अनुसार Japan, South Korea और भारत इस लिस्ट में सबसे नीचे रहे। हैरानी की बात यह है कि रोमांस के लिए मशहूर Italy और France भी इस बार निचले 10 देशों में शामिल हैं। इससे साफ होता है कि किसी देश की रोमांटिक छवि और वहां के लोगों की असल ज़िंदगी का अनुभव अलग-अलग हो सकता है।
सर्वे कैसे किया गया?
इस सर्वे में 29 देशों के करीब 23 हजार से ज्यादा वयस्कों (18 साल से ऊपर) से बातचीत की गई। भारत में लगभग 2,200 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें कुछ से आमने-सामने और कुछ से ऑनलाइन बातचीत की गई।
भावनात्मक जुड़ाव कमजोर, रोमांस में ठीक
रिपोर्ट बताती है कि भावनात्मक जुड़ाव के मामले में भारत नीचे के देशों में रहा। यानी रिश्तों में रहते हुए भी कई लोगों को गहरी भावनात्मक संतुष्टि नहीं मिल पा रही।
हालांकि रोमांस और निजी नज़दीकी के मामले में भारत की स्थिति थोड़ी बेहतर रही और इस श्रेणी में भारत टॉप 10 में शामिल रहा। इससे पता चलता है कि लोग रोमांस को लेकर तो ठीक महसूस करते हैं, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव में कमी नजर आती है।
क्या पैसा रिश्तों की खुशी बढ़ाता है?
सर्वे के अनुसार जिन लोगों की आय ज्यादा है, वे अपनी लव लाइफ से ज्यादा संतुष्ट नजर आते हैं। ज्यादा कमाने वाले लोगों में रिश्तों और रोमांस से संतुष्टि का स्तर कम आय वालों के मुकाबले ज्यादा पाया गया। यानी आर्थिक स्थिति भी रिश्तों की खुशी पर असर डालती है।
भारत की रैंकिंग कम क्यों रही?
इप्सोस इंडिया के सीईओ सुरेश रामलिंगम के मुताबिक, भारत को भले ही प्यार और कामसूत्र जैसी परंपराओं से जोड़ा जाता हो, लेकिन आज की बदलती जीवनशैली, काम का दबाव, रिश्तों में बढ़ती उम्मीदें और समय की कमी लोगों की निजी संतुष्टि को प्रभावित कर रही हैं।
नौकरी, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना कई लोगों के लिए मुश्किल हो गया है, जिसका असर रिश्तों पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हर तीन में से दो भारतीय अपनी लव लाइफ से संतुष्ट हैं। यानी हालात पूरी तरह खराब नहीं हैं। बस दूसरे देशों के मुकाबले संतुष्टि का स्तर थोड़ा कम दिख रहा है।
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