Trump Peace Plan: रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की वैश्विक कोशिशें तेज़ हो चुकी हैं, लेकिन इस जंग को रोकने की दिशा में अमेरिका का हालिया कदम एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सामने ऐसा ultimatum रखा है, जिसने न सिर्फ कीव की राजनीति को हिला दिया है, बल्कि पूरे यूरोपीय कूटनीतिक गलियारों में चिंता बढ़ा दी है.
अमेरिका ने जेलेंस्की को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर वे 27 नवंबर तक 28 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव पर दस्तख़त नहीं करते, तो उन्हें सत्ता से हटाया भी जा सकता है और जेल भी भेजा जा सकता है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि युद्ध को रोकने के लिए अब “किसी भी कीमत पर” निर्णायक कदम उठाना होगा. अमेरिकी विदेश विभाग ने यह चेतावनी आधिकारिक रूप से यूक्रेन सरकार तक पहुंचा दी है.
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरते जेलेंस्की (Trump Peace Plan)
इस संवेदनशील समय में जेलेंस्की की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. हाल के दिनों में उनके दो करीबी मंत्रियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसके चलते दोनों को पद छोड़ना पड़ा. इन विवादों की आंच सीधे राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंच रही है. विपक्ष और कुछ पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि इन मंत्रियों को लम्बे समय तक संरक्षण देने का आरोप जेलेंस्की पर भी लग सकता है और अमेरिका इसी दबाव का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है. रूस-यूक्रेन संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका ने पर्दे के पीछे एक विस्तृत योजना तैयार की है. इस 28 बिंदुओं वाले प्रस्ताव की कुछ मुख्य बातें यह हैं:
यूक्रेन की संप्रभुता की गारंटी (Trump Peace Plan)
युद्ध खत्म होने के बाद यूक्रेन को सीमित लेकिन औपचारिक रूप से संप्रभु राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी जाएगी. इसके तहत सुरक्षा, सीमा नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय वैधता सुनिश्चित करने का वादा है.
यूरोप-रूस तनाव को स्थायी रूप से कम करने की शर्तें
अमेरिका चाहता है कि रूस और यूरोप के बीच पिछले तीन दशकों से चले आ रहे अविश्वास और तनाव को हमेशा के लिए समाप्त किया जाए. इसके लिए रूस को दोबारा हमला न करने की गारंटी देनी होगी, जबकि नाटो को भी पूर्व दिशा में विस्तार रोकने की शर्त स्वीकार करनी होगी.
यूक्रेन की आपत्तियाँ और विवादित क्षेत्र
हाल ही में जेलेंस्की तुर्की गए थे ताकि युद्धविराम के लिए नई राह निकल सके. हालांकि अमेरिका के प्रस्ताव के कुछ बिंदु यूक्रेन को स्वीकार नहीं हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि क्रिमिया, डोनेत्स्क और लुहांस्क को रूस का हिस्सा मान्यता देने की शर्त इसमें शामिल है. इसके अलावा खेरसोन और जापोरेजिया में “जो जहां है वही उसका हिस्सा” वाली रेखा खींचने का सुझाव यूक्रेन के लिए और बड़ा झटका है. रूस इन क्षेत्रों से कुछ हद तक पीछे हटने को तैयार है, लेकिन यूक्रेन इन हिस्सों को किसी भी परिस्थिति में रूस को सौंपना नहीं चाहता.
सामने खड़े बड़े सवाल (Trump Peace Plan)
यूक्रेन पर युद्ध का दबाव पहले ही भारी है, और अब अमेरिका का यह ultimatum राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना रहा है. क्या जेलेंस्की अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकेंगे? क्या यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने का रास्ता बनेगा या एक नया संकट खड़ा करेगा? आने वाले दिनों में दुनिया की नज़र इसी भू-राजनीतिक खींचतान पर रहने वाली है.
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