वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल नीतिगत अस्थिरता और लगातार फैसलों से पीछे हटने के लिए जाना गया। सत्ता में आने के बाद मात्र 194 दिनों में ट्रंप प्रशासन ने जिस तेजी से नीतिगत फैसले लिए, उतनी ही तेजी से उन्हें पलट भी दिया। इस दौरान ट्रंप ने कुल 178 कार्यकारी आदेश (Executive Orders) पर दस्तखत किए, जिनमें से 34 फैसले खुद उन्हीं द्वारा बदले गए।
टैरिफ नीति में सबसे ज्यादा बदलाव
व्यापार और टैरिफ नीति ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे का मुख्य हिस्सा रही, लेकिन व्यवहार में यही सबसे अस्थिर क्षेत्र बन गया। आंकड़ों के अनुसार, टैरिफ से संबंधित 28 घोषणाएं ट्रंप ने कीं, लेकिन बाद में इनमें बार-बार संशोधन या वापसी की।
उदाहरण के लिए, कनाडा, चीन और यूरोपीय देशों पर आयात शुल्क लगाने की धमकियों ने बाजारों को हिला कर रख दिया। बाद में इन्हीं प्रस्तावों को या तो बदला गया या स्थगित कर दिया गया।
नीतियों की अस्थिरता और उद्योग जगत की उलझन
इस तरह की बार-बार बदलाव से खासकर उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। कारोबारी योजनाएं बनाने और निवेश निर्णयों में भारी दिक्कतें आईं।
फार्मास्युटिकल्स और तांबा (कॉपर) पर घोषित टैक्स छूट को भी ट्रंप कई बार वापस ले चुके थे, जिससे अमेरिकी उद्योगों में असमंजस फैल गया।
न्यायपालिका की दखल
ट्रंप प्रशासन की इन नीतिगत गड़बड़ियों का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहा। अदालतों में ट्रंप के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई।
अमेरिकी संघीय अदालतों ने अब तक ट्रंप के 200 से ज्यादा आदेशों पर रोक लगाई। इनमें कई फैसले जल्दबाजी में, असंवैधानिक या बिना पर्याप्त आधार के घोषित किए गए थे।
बर्थ राइट सिटिजनशिप विवाद
ट्रंप ने अमेरिका में जन्मे बच्चों को नागरिकता देने के अधिकार को खत्म करने की मंशा जताई थी। लेकिन 14वें संविधान संशोधन के खिलाफ जाकर इस आदेश को कुछ ही दिनों में अदालतों ने रोक दिया।
कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन
इक्विटी फंडिंग से जुड़ी कई सरकारी अनुबंधों को ट्रंप ने रद्द करने की कोशिश की थी। लेकिन इन फैसलों पर भी अदालतों ने हस्तक्षेप किया और उन्हें ठहराया।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बार-बार रुख बदला-
यूक्रेन सहायता पर यू-टर्न
9 जुलाई को ट्रंप ने यूक्रेन को दी जा रही सैन्य मदद रोक दी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में 10 पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अन्य हथियारों की मदद का आदेश भी दे दिया गया।
गाजा संघर्ष पर भ्रामक रुख
गाजा युद्ध को 24 घंटे में खत्म करने का दावा करने वाले ट्रंप ने कुछ महीनों बाद अपने ही बयान से किनारा कर लिया। 4 फरवरी को गाजा के नागरिकों के लिए पुनर्वास की बात की, लेकिन 21 फरवरी को कहा, “मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा।” फिर 12 मार्च को नई घोषणा कर दी।
अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई भी अधर में
22 जनवरी को अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन का आदेश जारी किया गया, लेकिन संवैधानिक चुनौतियों के कारण यह आदेश वापिस लेना पड़ा। इसके बाद नए रूप में फिर से इसे पेश किया गया।
मेक अमेरिका ग्रेट अगेन
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप ने “Make America Great Again” के वादे के तहत कई जल्दबाजी में निर्णय लिए, जिन्हें टिकाऊ बनाने के बजाय राजनीतिक दबाव, न्यायिक फैसलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया के चलते बदला गया।
इन यू-टर्न्स ने ट्रंप प्रशासन की नीति स्थिरता पर सवाल खड़े किए और जनता में भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न की।
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