जब घरों में दीयों की रौशनी फैलेगी, मिठाइयों की खुशबू हर कोने में महकेगी और बाजारों में रौनक लौटेगी, तब इस बार दिवाली सिर्फ रोशनी का नहीं, राहत का भी त्योहार बन सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से जो संदेश देशवासियों को दिया, उसमें केवल आज़ादी की बात नहीं थी, बल्कि आर्थिक आज़ादी की भी झलक थी। इस बार सरकार जनता को ‘डबल दिवाली’ का तोहफा देने की तैयारी में है और इसकी सबसे बड़ी सौगात मिल सकती है उन लोगों को जो इस फेस्टिव सीजन में दोपहिया या कार खरीदने का सपना देख रहे हैं।
क्या है जीएसटी 2.0 और कैसे बदलेगा हमारा बाजार?
जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर की शुरुआत को अब आठ साल पूरे हो चुके हैं। इस बीच इसे कई बार संशोधित किया गया, लेकिन अब सरकार इसे एक नए रूप में लाने की तैयारी में है, जिसे ‘जीएसटी 2.0’ कहा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया कि दिवाली तक देश में नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी लागू कर दिया जाएगा, जिसमें रोजमर्रा की चीजों से लेकर वाहनों तक पर टैक्स की दरों में राहत दी जा सकती है।
इस बदलाव के ज़रिए सरकार का मकसद साफ है- आम जनता को महंगाई से राहत देना, एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को सहारा देना, और सबसे अहम, देश की धीमी पड़ती ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को फिर से रफ्तार देना।
सस्ती हो सकती हैं बाइक और कारें, खरीदारी का सुनहरा मौका
सबसे बड़ी और दिलचस्प बात ये है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीएसटी 2.0 के तहत दोपहिया वाहनों और छोटी कारों पर जीएसटी की दर को 28% से घटाकर 18% किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो गाड़ियों की कीमतों में करीब 7% तक की कमी आ सकती है।
अब सोचिए, एक मिड-सेगमेंट बाइक जिसकी कीमत 1 लाख रुपये है, उस पर 7,000 रुपये तक की सीधी छूट मिल सकती है। वहीं एक छोटी कार, जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 6 लाख रुपये है, वह 40 से 50 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती है।
इससे न सिर्फ आम ग्राहक को फायदा मिलेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी राहत की सांस मिलेगी, जो पिछले कुछ महीनों से बिक्री में गिरावट का सामना कर रही हैं।
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क्यों जरूरी है ये फैसला ऑटो सेक्टर के लिए?
साल 2025 की शुरुआत ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत उत्साहजनक नहीं रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस साल ट्रैक्टर को छोड़कर बाकी सभी कैटेगरी की गाड़ियों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। दोपहिया वाहनों की बिक्री में करीब 4% और कारों की बिक्री में 1% की गिरावट आई है।
कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री स्थिर रही है, लेकिन ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में मांग का धीमा होना एक चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में अगर सरकार जीएसटी की दरों में कटौती करती है, तो यह सेक्टर एक नई ऊर्जा के साथ फेस्टिव सीजन का स्वागत कर सकता है।
दिवाली में डबल खुशियां, जनता को सीधा फायदा
हर साल दिवाली के आसपास लोग नए वाहन खरीदने की योजना बनाते हैं। यह केवल परंपरा नहीं, एक आर्थिक चक्र भी है, जिसमें बाजार की मांग चरम पर पहुंचती है। अगर इस बार जीएसटी में कटौती होती है, तो यह आम जनता के लिए ‘डबल दिवाली’ जैसा ही होगा एक तरफ रौशनी और त्योहार की खुशी, दूसरी तरफ पैसों की बचत और बड़े सपनों की साकारता।
दोपहिया वाहन छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग के लिए एक जरूरी साधन बन चुके हैं। वहीं छोटी कारें परिवारों के लिए सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाती हैं। अगर कीमतें कम होंगी, तो लोगों को अपनी जरूरतें पूरी करने का बेहतर मौका मिलेगा।
छोटे कारोबारियों और एमएसएमई को भी फायदा
इस बदलाव का असर केवल आम ग्राहकों तक सीमित नहीं रहेगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि नई टैक्स व्यवस्था से एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को भी राहत मिलेगी। टैक्स का बोझ घटने से इन संस्थानों को अपनी लागत कम करने और ग्राहकों को बेहतर दाम पर सेवा देने का अवसर मिलेगा।
ऑटो सेक्टर से जुड़े छोटे स्पेयर पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स, डीलरशिप्स और लोकल वर्कशॉप्स के लिए भी यह बदलाव एक नई शुरुआत जैसा होगा।
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