Silver Price: वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ते ही निवेशक एक बार फिर सुरक्षित धातुओं का रुख कर रहे हैं। लेकिन इस बार सोना नहीं, चांदी निवेशकों की पहली पसंद बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 61 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुकी है, जबकि घरेलू बाजार MCX पर इसका भाव तेज़ी से बढ़कर 2 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गया है। दिसंबर के शुरुआती हफ्तों में ही चांदी कई हजार रुपये प्रति किलो चढ़ चुकी है, जिससे यह भारतीय बाजार में अब तक के सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गई है।
औद्योगिक मांग बढ़ी, इसलिए उछल गई कीमत
चांदी की इस बेहतरीन रैली के पीछे कई बड़े ग्लोबल फैक्टर काम कर रहे हैं:
ग्रीन एनर्जी सेक्टर में उछाल:
इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनल और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में चांदी की भारी खपत होती है। दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बदलाव इस धातु की मांग को लगातार बढ़ा रहा है।
टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर उद्योग:
हाई-टेक डिवाइसेस, डेटा सेंटर, AI आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में चांदी अनिवार्य हो चुकी है। इससे उद्योग जगत में इसकी मांग पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
सप्लाई कम, लीज रेट्स बढ़े:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की लीजिंग रेट तेजी से ऊपर गए हैं, जो संकेत देता है कि धातु की उपलब्धता कम है। सीमित सप्लाई और बढ़ती डिमांड दोनों मिलकर कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले गई हैं।
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फेडरल रिज़र्व की दरों में कटौती का बड़ा असर
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इसके कारण:
- डॉलर कमजोर हुआ
- कीमती धातुओं की कीमतें मजबूत हुईं
- निवेशकों ने बॉन्ड व इक्विटी से पैसा निकालकर गोल्ड-सिल्वर में लगाया
यही वजह है कि सिर्फ एक सत्र में ही भारत में चांदी 6,500 रुपये से ज्यादा उछल गई और 1,85,488 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
भारत में चांदी क्यों इतनी तेजी से चढ़ी?
घरेलू बाजार के कुछ खास कारणों ने भी कीमतों को सपोर्ट दिया है—
रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे इम्पोर्टेड चांदी महंगी हो रही है।
त्योहारी और शादी सीजन की मांग: दिसंबर और जनवरी के बीच चांदी के सिक्के, बार और ज्वेलरी की मांग चरम पर रहती है।
सिल्वर ETF में भारी निवेश: निवेशकों का रुझान तेजी से ETF और बुल्क हेजिंग की ओर बढ़ रहा है।
रेडार पर इंडस्ट्रियल यूजर्स की आक्रामक खरीदारी: भविष्य की कीमतों को देखते हुए कई उद्योग पहले से ही ज्यादा स्टॉक जमा कर रहे हैं।
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