नई दिल्ली: हम हर दिन सुबह उठते हैं, अपने परिवार के साथ वक्त बिताते हैं, काम पर जाते हैं, सपने देखते हैं और एक बेहतर भविष्य की उम्मीद करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस हवा में आप सांस ले रहे हैं, वो आपकी ज़िंदगी के कई साल चुरा रही है? ये सिर्फ एक डरावनी कल्पना नहीं, बल्कि कड़वा सच है।
एक नई रिपोर्ट ने इस हकीकत से पर्दा उठाया है कि भारत में रहने वाले लोगों की औसत उम्र 3.5 साल तक घट रही है, और वजह है- जहरीली हवा। आइए जानते हैं, ये रिपोर्ट क्या कहती है और किन राज्यों पर है सबसे बड़ा खतरा।
वायु प्रदूषण बना भारतीयों की उम्र का दुश्मन
शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) ने 2025 के लिए जो वायु गुणवत्ता रिपोर्ट जारी की है, उसमें भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में देश में PM 2.5 कणों की मात्रा 2022 से ज्यादा थी और ये विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के तय मानक से पूरे आठ गुना अधिक रही।
अगर वायु गुणवत्ता को WHO के मानकों के अनुरूप लाया जाए, तो भारत में रहने वाले हर नागरिक की औसत उम्र 3.5 साल तक बढ़ सकती है। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं है, यह किसी बच्चे का बचपन है, किसी मां-बाप का सहारा है, किसी युवा का अधूरा सपना है।
भारत की 1.4 अरब आबादी ज़हरीली हवा में
आज भारत की पूरी आबादी, यानी 1.4 अरब लोग, ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां की हवा में PM 2.5 का स्तर WHO के मानकों से कहीं ज्यादा है। यहां तक कि जो क्षेत्र देश के “सबसे स्वच्छ” माने जाते हैं, वहां के लोग भी अगर साफ हवा में सांस लें, तो लगभग 9.4 महीने ज्यादा जी सकते हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत की 46% आबादी ऐसे क्षेत्रों में रह रही है जहां पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से भी ज्यादा है। अगर सिर्फ इसे ही घटाकर राष्ट्रीय स्तर पर लाया जाए, तो भी इन लोगों की उम्र 1.5 साल तक बढ़ सकती है।
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दिल्ली और उत्तरी भारत की सबसे बुरी हालत
देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सबसे प्रदूषित शहरों में टॉप पर है। अगर यहां की हवा को WHO के दिशा-निर्देशों के अनुसार शुद्ध किया जाए, तो दिल्लीवासियों की औसत उम्र 8.2 साल तक बढ़ सकती है। ये एक चौंकाने वाला आंकड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी मैदानी क्षेत्र, जहां करीब 38.9% भारतीय आबादी रहती है, अगर यहां की हवा स्वच्छ हो जाए, तो इन इलाकों में रहने वाले लोग औसतन 5 साल ज्यादा जी सकते हैं।
राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र पर भी मंडरा रहा खतरा
दिल्ली के अलावा तीन और बड़े राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र भी इस संकट की चपेट में हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
- राजस्थान में स्वच्छ हवा मिलने पर लोगों की उम्र 3.3 साल तक बढ़ सकती है।
- मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 3.1 साल का है।
- महाराष्ट्र में 2.8 साल तक की उम्र बढ़ाई जा सकती है, अगर हवा को WHO स्तर तक सुधारा जाए।
इन राज्यों में तेजी से शहरीकरण और औद्योगीकरण के चलते हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, और आम लोग इसकी कीमत अपनी सेहत से चुका रहे हैं।
एनसीएपी योजना: उम्मीद की एक किरण
भारत सरकार ने 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) की शुरुआत की थी, जिसका मकसद था 2024 तक 20-30% तक कण प्रदूषण को कम करना। 2022 में इस लक्ष्य को और बड़ा कर 131 शहरों में 2026 तक 40% कटौती का टारगेट रखा गया।
इस दिशा में कुछ प्रगति जरूर हुई है। 2023 तक इन शहरों में वायु प्रदूषण 10.7% कम हुआ है, जिससे करीब 44.55 करोड़ लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा 6 महीने बढ़ी है।
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