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पीएम मोदी थे आतंकियों का असली टारगेट! राम मंदिर में करना था विस्फोट… डॉक्टरों की प्लानिंग का खुालासा

Delhi Blast Target: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब एक ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। यह सिर्फ एक साधारण ब्लास्ट नहीं था, बल्कि एक सुव्यवस्थित, व्यापक और बहुस्तरीय आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था, जो देश के चार बड़े शहरों में आठ धमाके करने की तैयारी में था। जांच के दायरे में आए डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मॉड्यूल आम अपराधियों का नहीं, बल्कि शिक्षित और पेशेवर लोगों का नेटवर्क था जिसे एजेंसियां ‘व्हाइट कॉलर टेररिज़्म’ कह रही हैं।

देशभर में 2,900 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री की बरामदगी ने इस साजिश की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। जांच अधिकारी अब इस टेरर मॉड्यूल के हर सदस्य की गतिविधि, संपर्क और विदेश से मिले निर्देशों को जोड़ने में लगे हुए हैं।

10 दिनों में बनी बड़ी साजिश

जम्मू-कश्मीर पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जांच टीम अब डॉक्टर उमर नबी पर विशेष ध्यान दे रही है। माना जा रहा है कि वही इस मॉड्यूल का केंद्रीय हिस्सा था और लाल किले के पास विस्फोटक लेकर गई कार से उसका सीधा संबंध है।

जांच में जिन बातों ने संदेह बढ़ाया:

  • 30 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच उमर की गतिविधियां संदिग्ध थीं
  • इसी अवधि में उसके सहयोगी डॉक्टर मुजम्मिल की गिरफ्तारी हुई
  • तीसरे आरोपी डॉक्टर आदिल राथर से पूछताछ में उमर का नाम दोबारा सामने आया

सूत्रों का कहना है कि 30 अक्टूबर तक यह नेटवर्क विस्फोटक और गाड़ियों की पूरी व्यवस्था नहीं कर पाया था, लेकिन 10 नवंबर तक उन्होंने उच्च श्रेणी के विस्फोटकों से भरी एक कार तैयार कर दी, जिसमें बाद में ब्लास्ट हुआ।

एजेंसियों को शक था कि इस दौरान उमर को किसी बाहरी नेटवर्क से विशेष सहायता मिली होगी। अब, जांचकर्ताओं के हाथ ऐसे महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय साजिश और स्पष्ट हुई है।

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NIA का खुलासा: चार शहरों में धमाकों की योजना

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य खुफिया एजेंसियों ने इस मॉड्यूल के विदेशी कनेक्शन को ट्रैक करते हुए बड़ा खुलासा किया है।

खुफिया जानकारी के अनुसार:

  • मॉड्यूल 4 बड़े शहरों में 8 धमाके करने की तैयारी में था
  • हमला दो प्रमुख तारीखों को अंजाम दिया जाना था—
  • 25 नवंबर
  • 6 दिसंबर

25 नवंबर को अयोध्या में एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम होना था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी संभावित थी। मॉड्यूल की योजना थी कि इसी कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा विस्फोट किया जाए।

6 दिसंबर को दिल्ली में भी एक और आतंकी वारदात को क्रियान्वित करने की साजिश रची जा रही थी।

विदेशी हैंडलर ‘उकासा’ से मिला निर्देश

जांच में पता चला है कि इस मॉड्यूल की शुरुआत 2022 में विदेश से हुई थी। ‘उकासा’ नाम का एक कथित विदेशी हैंडलर इस पूरी साजिश को नियंत्रित कर रहा था।

उकासा की भूमिका:

  • मॉड्यूल के सदस्यों को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स के जरिए निर्देश देना
  • पैसे, तकनीकी सहायता और रणनीति उपलब्ध कराना
  • लक्ष्य निर्धारित करना और समय तय करना

सूत्र बताते हैं कि उमर और मुजम्मिल ने 2023 से जनवरी 2025 के बीच लाल किले और आसपास के इलाकों की कई बार रेकी की थी। यह साजिश एक दिन की योजना नहीं थी, यह कई महीनों की तैयारी का परिणाम थी।

पुरानी गाड़ियों को बनाया जा रहा था हथियार

जांच से पता चलता है कि इस मॉड्यूल के सदस्य डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए पहले टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे थे। बाद में उन्होंने और भी अधिक सुरक्षित माने जाने वाले सिग्नल और सेशन जैसे एनक्रिप्टेड एप्लिकेशन अपना लिए।

तकनीक का दुरुपयोग:

  • बातचीत का कोई रिकॉर्ड न रहे, इसलिए ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ वाले ऐप्स
  • पुरानी कारों को विस्फोटक से भरकर ‘मोबाइल बम’ की तरह इस्तेमाल करना
  • विभिन्न राज्यों में अलग-अलग जगह विस्फोटक जमा करना

कुल मिलाकर, यह नेटवर्क आधुनिक तकनीक और क्लासिक आतंकी तरीक़ों का मिला-जुला रूप था।

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Shreeom Singh

Shreeom Singh is a Digital Journalist with over 3 years of experience in the media industry. Having worked with prestigious organizations like Bharat 24, Network 10, and APN News. Shreeom specializes in a wide spectrum of beats, including World, Sports, Business, Lifestyle, and Health. He is dedicated to delivering well-researched and engaging stories to a global audience.

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