ट्रंप के टैरिफ पर अब आर-पार के मूड में भारत, पीएम मोदी बोले- ‘जो भी कीमत चुकानी पड़ेगी, वह चुकाएंगे, लेकिन…’
नई दिल्ली: जब किसी देश के किसानों का भविष्य दांव पर हो, तो फैसला भावनाओं से नहीं, हिम्मत से लिया जाता है। भारत, जहां करोड़ों लोगों की जिंदगी खेती और पशुपालन पर टिकी है, आज अपने हक और सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये साफ कर दिया है कि भारत अब झुकने वाला नहीं। अमेरिका की तरफ से लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के बावजूद, भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। यह केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि भारतीय अन्नदाता की अस्मिता की लड़ाई है।
हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर 7 अगस्त से 25% और 27 अगस्त से अतिरिक्त 25% यानी कुल 50% शुल्क लगेगा। इसका सीधा असर भारतीय सामानों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे अमेरिकी बाजार में उनकी मांग घट सकती है। लेकिन इसके बावजूद भारत ने अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, घी, चीज़ वगैरह भारत में खुलकर बिकें। वो चाहता है कि भारतीय बाजार में उसकी जैविक (GMO) फसलें और दूसरे कृषि उत्पादों को कम टैक्स के साथ एंट्री मिले। लेकिन भारत इस मांग को किसानों और देसी उत्पादकों के लिए नुकसानदेह मानता है। मोदी सरकार का कहना है कि हमारे देश का दूध दुनिया का सबसे स्वच्छ और पौष्टिक है, और हम इसे किसी भी सस्ते विदेशी माल के सामने मिटने नहीं देंगे।
पीएम मोदी ने कहा- “मैं कीमत चुकाने को तैयार हूं”
दिल्ली में आयोजित एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पीएम मोदी का भावुक बयान आया – “मैं जानता हूं कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।” ये शब्द केवल एक राजनीतिक नेता के नहीं, बल्कि किसानों के एक प्रहरी के थे जो हर हाल में अपने अन्नदाताओं के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हित में कोई भी समझौता नहीं करेगा। उनके लिए ये देश के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की बात है। ये बयान सिर्फ अमेरिकी नीतियों के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन तमाम वैश्विक दबावों के खिलाफ था जो भारत को अपने मूल्यों से समझौता करने के लिए मजबूर करते हैं।
एमएस स्वामीनाथन का सपना और मोदी का संकल्प
पीएम मोदी ने महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए समर्पित रहा। उनके विचार आने वाली कई शताब्दियों तक भारत की नीतियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने याद किया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब स्वामीनाथन जी ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में विशेष रुचि ली थी और इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
यह संबंध केवल एक वैज्ञानिक और एक नेता के बीच का नहीं था, बल्कि दो विजनरी लोगों के बीच था जो देश की मिट्टी को पहचानते हैं और उस पर विश्वास करते हैं।
किसानों के लिए बनी योजनाएं, जो आत्मबल देती हैं
मोदी सरकार ने बीते वर्षों में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। PM किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से किसानों को सीधी आर्थिक सहायता मिल रही है। PM फसल बीमा योजना ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा दी है। सिंचाई की समस्याएं PM कृषि सिंचाई योजना से हल हो रही हैं और 10 हजार FPOs (किसान उत्पादक संगठन) छोटे किसानों को एकजुट कर ताकत दे रहे हैं।
e-NAM जैसी योजनाओं ने मंडी व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल बनाया, जिससे किसानों को अपनी फसल का सही मूल्य मिलना शुरू हुआ है। ये सारे प्रयास यही बताते हैं कि भारत अब केवल अनाज उगाने वाला देश नहीं, बल्कि किसान-समर्थ राष्ट्र बनने की राह पर है।
अमेरिका की शर्तों पर नहीं बिकेगा भारत
अमेरिका भारत को अपने डेयरी उत्पाद और जीएम फसलें बेचने के लिए दबाव बना रहा है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि यहां की जनता शुद्ध शाकाहारी डेयरी उत्पादों में विश्वास करती है, और अमेरिकी उत्पादों में ऐसे एंजाइम्स का प्रयोग होता है जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं।
इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि भारत गेहूं, मक्का, सेब और अन्य फलों पर लगने वाला आयात शुल्क कम करे ताकि उनके उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से बिक सकें। लेकिन भारत की सरकार को यह डर है कि इससे हमारे छोटे किसान तबाह हो जाएंगे।
बातचीत का रास्ता खुला, पर नर्मी की गारंटी नहीं
भले ही अमेरिका ने टैरिफ बढ़ा दिए हों, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। 24 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा, जो ट्रेड डील के छठे दौर की बातचीत करेगा। लेकिन भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते में देश के किसानों का हित सर्वोपरि रहेगा।
अमेरिका के भीतर भी टैरिफ को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। ट्रम्प प्रशासन घरेलू मोर्चे पर भी इस फैसले को लेकर दबाव में है। भारत ने इसे “अनुचित और तर्कहीन” फैसला बताया है और स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
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