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पुत्रमोह में फंस गए नीतीश कुमार! परिवारवाद के विरोधी खुद सवालों में घिरे, गरमाई बिहार की सियासत

Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से राजनीति में परिवारवाद के विरोधी माने जाते रहे हैं। वे अक्सर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और अन्य दलों पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब उनके बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। शनिवार को निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से जनता दल (यू) की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिसके बाद विपक्ष ने नीतीश कुमार को उनके पुराने बयानों की याद दिलानी शुरू कर दी है।

समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे नीतीश

नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन समाजवादी विचारधारा से जुड़ा रहा है। वे कई बार कह चुके हैं कि परिवारवाद लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। वे अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का उदाहरण देते रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवनकाल में परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। नीतीश कुमार भी खुद को कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का अनुयायी बताते रहे हैं और कहते रहे हैं कि उन्होंने भी अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा है।

राहुल गांधी के बयान का किया था विरोध

साल 2017 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत की राजनीति में परिवारवाद आम बात है और कई प्रमुख नेता राजनीतिक परिवारों से आते हैं। इस पर नीतीश कुमार ने कड़ा विरोध जताया था। उन्होंने कहा था कि परिवारवाद को सामान्य मानना गलत है और केवल राजनीतिक परिवार में जन्म लेने से कोई व्यक्ति शासन के योग्य नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा था कि गैर-परिवारवादी नेता अक्सर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

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लालू यादव के परिवारवाद पर रहे हमलावर

नीतीश कुमार ने कई मौकों पर राजद और लालू प्रसाद यादव के परिवार को लेकर परिवारवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग अपने परिवार को ही राजनीति में आगे बढ़ाते हैं। लालू यादव के परिवार में उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव के अलावा बेटी मीसा भारती भी राजनीति में सक्रिय हैं। इसी मुद्दे को लेकर नीतीश कुमार अक्सर राजद की आलोचना करते रहे हैं।

पिछले एक साल से चल रही थी चर्चा

पिछले एक साल से निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा चल रही थी। आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले निशांत ने अपने गांव के एक कार्यक्रम में लोगों से अपील की थी कि उनके पिता को उनके काम के आधार पर फिर से समर्थन दिया जाए। इसके बाद से उनके राजनीति में आने को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।

हालांकि इस मुद्दे पर लंबे समय तक न तो नीतीश कुमार ने कोई स्पष्ट बयान दिया और न ही निशांत कुमार ने खुलकर कुछ कहा। लेकिन अब निशांत कुमार के जेडीयू में शामिल होने के बाद विपक्ष इसे नीतीश कुमार के रुख में बदलाव के तौर पर देख रहा है। आलोचकों का कहना है कि वर्षों तक परिवारवाद के खिलाफ बोलने वाले नेता अब अपने बेटे की राजनीतिक एंट्री को मंजूरी देकर सवालों के घेरे में आ गए हैं।

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