Male Urinary Habits: हम अक्सर अपने घरों में स्वच्छता और हाइजीन को लेकर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते हैं. कई बार पार्टनर के बीच भी यह चर्चा होती है कि सीट गंदी न हो, इसलिए बैठकर पेशाब करना बेहतर है. लेकिन अब यह मुद्दा सिर्फ घरेलू पसंद का नहीं रहा. हालिया अध्ययनों और दुनिया भर में किए गए सर्वेक्षण यह संकेत दे रहे हैं कि कुछ पुरुषों के लिए बैठकर पेशाब करना सिर्फ साफ-सफाई का विकल्प नहीं, बल्कि एक हेल्थ-फ्रेंडली आदत भी हो सकती है. यही वजह है कि यह एक साधारण सा सवाल आज मेडिकल विशेषज्ञों और सोशल मीडिया दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
एक वैश्विक सर्वे में लगभग 7,000 पुरुषों से पूछा गया कि वे पेशाब (Male Urinary Habits) कैसे करते हैं. खड़े होकर या बैठकर. इस छोटे से सवाल ने बड़ी बहस को जन्म दे दिया. जर्मनी में लगभग 40 प्रतिशत पुरुष हर बार बैठकर पेशाब करने की आदत रखते हैं. ऑस्ट्रेलिया में भी यह आदत धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है, खासकर युवाओं में जहां 36 प्रतिशत पुरुष बैठकर पेशाब करना अधिक सहज मानते हैं. इसके विपरीत, अमेरिका में सिर्फ 10 प्रतिशत पुरुष यह तरीका अपनाते हैं. कई देशों में इसे पुरुषत्व और शक्ति से जोड़कर देखा जाता है, जबकि जर्मनी में Sitzpinkler जैसे शब्द का उपयोग मजाक या ताने के रूप में भी किया जाता है.
क्या दोनों तरीकों में स्वास्थ्य के लिहाज से कोई अंतर है? (Male Urinary Habits)
स्वस्थ पुरुषों के लिए चिकित्सा की दृष्टि से दोनों तरीकों में खास अंतर नहीं देखा गया. शोध बताते हैं कि बैठकर या खड़े होकर पेशाब करने से न ही फ्लो में बड़ा अंतर आता है और न ही ब्लैडर खाली होने की क्षमता पर असर पड़ता है. यानी किसी भी स्वस्थ पुरुष के लिए यह पूरी तरह व्यक्तिगत पसंद का मामला है. हालांकि खड़े होकर पेशाब करने पर सीट साफ रखना एक जिम्मेदारी जरूर बन जाती है, खासकर घर और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए.
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कब मुद्रा फर्क डालती है
उन पुरुषों के लिए पेशाब की मुद्रा मायने रख सकती है जिन्हें पहले से पेशाब से जुड़ी दिक्कतें हैं. जैसे हल्की धार आना, रुक-रुककर पेशाब होना या यह महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ. ऐसे मामलों में बैठकर पेशाब करना कुछ पुरुषों के लिए ज्यादा आरामदायक साबित होता है और फ्लो को बेहतर कर सकता है. वहीं बढ़ी हुई प्रोस्टेट की समस्या वाले कुछ पुरुषों को खड़े होकर पेशाब करने से अधिक राहत मिलती है. चूंकि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है, इसलिए ऐसी स्थितियों में डॉक्टर की सलाह सबसे उचित होती है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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