नई दिल्ली: कश्मीर घाटी में आतंकियों के पास आधुनिक हथियारों की मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘महादेव’ में मारे गए आतंकवादी अबू मूसा उर्फ मूसा सुलेमानी के पास से अमेरिका में बनी M4 कार्बाइन राइफल बरामद हुई है. यह वही हथियार है जो अमेरिकी सेना लंबे समय से अपने अभियानों में इस्तेमाल करती रही है.
भारतीय सेना ने श्रीनगर के हरवान इलाके के लिडवास गांव में ऑपरेशन को अंजाम दिया. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों की मुठभेड़ तीन आतंकवादियों से हुई, जिनमें मूसा सुलेमानी भी शामिल था. बताया जा रहा है कि वह हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल था. मुठभेड़ के बाद मौके से M4 कार्बाइन, एके-47 राइफल और भारी मात्रा में गोलाबारूद बरामद किया गया. साथ ही पाकिस्तान निर्मित चिकित्सा सामग्री भी मिली, जिससे आतंकी नेटवर्क की विदेशी जड़ों की पुष्टि होती है.
क्या है M4 कार्बाइन और क्यों है खतरनाक?
M4 एक आधुनिक, हल्की और घातक असॉल्ट राइफल है जिसे 1980 के दशक में अमेरिकी सेना के लिए डिजाइन किया गया था. इसे M16 राइफल का कॉम्पैक्ट और अपग्रेडेड वर्जन माना जाता है.
- कैलिबर: 5.56×45mm NATO
- फायरिंग क्षमता: 700–950 राउंड प्रति मिनट
- प्रभावी रेंज: लगभग 500 से 600 मीटर
- अधिकतम मारक दूरी: 3 किलोमीटर से अधिक
- वजन: हल्की और पोर्टेबल
- खासियत: इसमें ऑप्टिकल साइट्स, सप्रेसर, ग्रेनेड लॉन्चर जैसे एडवांस अटैचमेंट आसानी से जोड़े जा सकते हैं.
हालांकि यह बेहद सक्षम हथियार है, लेकिन इसके लिए नियमित मेंटेनेंस की जरूरत होती है. धूल या नमी वाले इलाकों में इसके जाम होने की संभावना बनी रहती है.
आतंकियों तक कैसे पहुंची अमेरिकी राइफल?
सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यह आधुनिक राइफल आतंकी के पास कैसे पहुंची? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा संबंध अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज की वापसी से जुड़ा है.
जब अमेरिकी सेना ने 2021 में अफगानिस्तान छोड़ा, तो बड़ी संख्या में हथियार वहीं रह गए. इनमें हजारों M4 कार्बाइन भी शामिल थीं. बाद में ये हथियार तालिबान के कब्जे में आ गए. माना जा रहा है कि इन्हीं में से कई राइफलें ब्लैक मार्केट के जरिए पाकिस्तान पहुंची और फिर वहां से आतंकियों के जरिए जम्मू-कश्मीर में भेजी गईं.
संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान में करीब एक लाख अमेरिकी हथियार पीछे छूट गए थे, जिनमें से एक बड़ी संख्या अब गैरकानूनी हथियार तस्करी नेटवर्क के जरिए सीमा पार हो रही है.
भारतीय सेना की राइफलों से कितनी अलग है M4?
भारत में सेना के पास मुख्य रूप से INSAS और एके-47 राइफलें हैं. अगर इनकी तुलना M4 कार्बाइन से करें, तो कुछ महत्वपूर्ण अंतर सामने आते हैं:
M4 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे मॉड्यूलर तरीके से कस्टमाइज किया जा सकता है. ऑपरेशन की जरूरत के अनुसार इसमें एडवांस अटैचमेंट जोड़कर इसकी मारक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.