Holi 2026 पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव? प्रेमानंद महाराज ने बताए सूतक काल के जरूरी नियम
Holi 2026: प्रेमानंद महाराज के प्रवचन अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं। वह भक्तों के सवालों का जवाब बेहद सरल और स्नेहपूर्ण भाषा में देते हैं। लोग उनसे केवल भक्ति मार्ग ही नहीं, बल्कि जीवन की रोजमर्रा की परेशानियों पर भी मार्गदर्शन लेते हैं।
हाल ही में एक भक्त ने साल 2026 में पड़ने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर उनसे प्रश्न किया। चूंकि यह ग्रहण होलिका दहन के दिन पड़ रहा है, इसलिए लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह की शंकाएं हैं। महाराज ने विस्तार से इन सवालों का समाधान बताया।
नाम जप को बताया सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
महाराज का कहना है कि ग्रहण के समय घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि सजग रहने की आवश्यकता है। उनके अनुसार इस दौरान वातावरण में नकारात्मकता बढ़ सकती है। इससे बचाव के लिए भगवान के नाम का स्मरण सबसे प्रभावी उपाय है।
उन्होंने सलाह दी कि अपने इष्ट देव का नाम, गुरु मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करें। उनका मानना है कि ग्रहण काल में किया गया नाम जप मन को स्थिर करता है और अशुभ प्रभावों से रक्षा करता है।
ग्रहण से पहले क्या करें?
महाराज ने ग्रहण शुरू होने से पहले की तैयारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रहण लगने से लगभग एक घंटा पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शांत स्थान या पूजा स्थल पर बैठकर प्रभु का ध्यान करें।
इस प्रकार मानसिक रूप से तैयार रहने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
ये भी पढ़ें- अमेरिका में हिंदू सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा धार्मिक समुदाय, यहूदी-मुस्लिम से भी आगे, रिसर्च में खुलासा
ग्रहण समाप्ति के बाद के नियम
ग्रहण समाप्त होते ही सामान्य कार्यों में तुरंत न लगें। महाराज के अनुसार ग्रहण खत्म होने के बाद कुछ समय तक जप जारी रखें। इसके पश्चात पुनः स्नान करें और फिर ही भोजन या अन्य कार्य आरंभ करें। यह प्रक्रिया मन और शरीर की शुद्धि के लिए आवश्यक बताई गई है।
होलिका दहन और ग्रहण का विशेष संयोग
साल 2026 में 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो होलिका दहन के दिन है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण सिंह राशि में माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे दुर्लभ संयोग में की गई साधना विशेष फल देती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।
सूतक काल और ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। सूतक काल सुबह 9:39 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में मंदिरों के द्वार बंद रखे जाते हैं और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। महाराज ने इस पूरे समय में मानसिक जप और ईश्वर स्मरण को ही सर्वोत्तम उपाय बताया है।
ये भी पढ़ें- कट्टर दुश्मन हैं इजराइल-फिलिस्तीन, फिर भी दोनों देशों से भारत के मजबूत रिश्ते, कैसे बनाया है संतुलन?