Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने न केवल मानवता बल्कि चिकित्सा पेशे की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के एक निजी अस्पताल के कर्मचारियों ने इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद शव को सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर फेंक कर भागने की कोशिश की।
क्या हुआ घटना स्थल पर?
घटना लखनऊ के लोकबंधु राज नारायण अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर हुई। अधिकारियों के अनुसार, सरोजिनी नगर के रहने वाले कर्मवीर सिंह सोमवार को तबीयत खराब होने पर एक निजी अस्पताल में पहुंचे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, लेकिन परिवार को इस बारे में सूचित नहीं किया गया।
इसके बजाय, अस्पताल के दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर मृतक के शव को एम्बुलेंस में रखकर लोकबंधु राज नारायण अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर स्ट्रेचर पर फेंक दिया। शव को कई घंटे तक वहीं लावारिस रखा गया, जब तक अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे देखा और पुलिस को सूचना नहीं दी।
सीसीटीवी में कैद हुई शर्मनाक हरकत
घटना की गंभीरता इस बात से बढ़ जाती है कि इस पूरे घटना का वीडियो सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया। फुटेज में दिखाया गया कि कैसे निजी अस्पताल के दो कर्मचारी स्ट्रेचर को इमरजेंसी गेट पर लाकर छोड़ते हैं और बिना किसी सूचना के वहां से चले जाते हैं।
पुलिस ने मृतक के जेब से मिले कागजातों के आधार पर उनकी पहचान की और मामले की जांच शुरू कर दी। निजी अस्पताल को नोटिस जारी कर सख्त जवाबदेही मांगी गई है। मृतक के परिवार ने भी अस्पताल पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है।
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अधिकारियों की प्रतिक्रिया
सीएमओ डॉ. एन बी सिंह ने बुधवार को कहा कि अगर जांच में यह साबित होता है कि निजी अस्पताल के कर्मचारी के खिलाफ आरोप सही हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल का यह व्यवहार न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी तौर पर भी गंभीर अपराध माना जा सकता है।
स्थानीय पुलिस ने भी मामले की जांच तेज कर दी है और आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
समाज और मानवता पर सवाल
राजधानी लखनऊ में हुई यह घटना केवल एक जघन्य कृत्य ही नहीं है, बल्कि मानवता पर कलंक भी है। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसा व्यवहार दिखाता है कि कुछ लोग पेशेवर जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी कर सकते हैं।
यह घटना समाज में मानवीय मूल्यों की कमी और स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं मरीजों और उनके परिवारों में अस्पतालों के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं।