Russin Crude Oil: मिडिल ईस्ट जंग के बीच रूस से तेल खरीदेगा भारत, नहीं होगा पेट्रोल-डीजल का संकट
Russin Crude Oil: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ने से कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे तेल आयात पर निर्भर देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत भी अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए संकट की स्थिति में यहां पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर आशंका पैदा हो सकती थी।
हालांकि इस बीच अमेरिका ने भारत को बड़ी राहत देते हुए एक अहम फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी अनुमति दे दी है। इस फैसले से फिलहाल भारत के लिए तेल सप्लाई बनाए रखना आसान हो जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ी थीं कीमतें
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरों से वैश्विक तेल बाजार में घबराहट फैल गई थी। इस कारण कच्चे तेल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई थी।
हालांकि शुक्रवार को बाजार में कुछ नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड लगभग दो प्रतिशत गिरकर करीब 83.72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
अमेरिका ने दी 30 दिन की अस्थायी छूट
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के तहत अमेरिका में तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। वैश्विक बाजार में सप्लाई संतुलन बनाए रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 30 दिन की अस्थायी मोहलत देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल उन रूसी तेल शिपमेंट्स के लिए है जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में हैं। इससे रूस को कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि नया निर्यात नहीं, बल्कि पहले से फंसे कार्गो का लेन-देन होगा।
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भारत को बताया अहम साझेदार
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार है और उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत अमेरिका से ऊर्जा आयात भी बढ़ाएगा। उनके मुताबिक यह अस्थायी कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बने दबाव को कम करने में मदद करेगा, जो क्षेत्रीय तनाव के कारण पैदा हुआ है।
फिलहाल रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। हालांकि हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में कुछ कमी की थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में एक बार फिर रूसी तेल की मांग बढ़ती दिख रही है।
पहले रूस से तेल कम खरीदने का दबाव
दरअसल पिछले कुछ महीनों से अमेरिका नई दिल्ली पर दबाव बना रहा था कि वह रूस से तेल आयात कम करे, ताकि यूक्रेन युद्ध के दौरान मॉस्को को मिलने वाली आय सीमित की जा सके।
लेकिन वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अस्थायी राहत देते हुए भारतीय कंपनियों को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद की अनुमति दे दी है।
सीधे रूस से नया तेल नहीं आएगा
अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी 30 दिन की छूट के तहत भारतीय रिफाइनरियां केवल उन रूसी तेल खेपों को खरीद सकती हैं जो पहले से समुद्री मार्ग में हैं। रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद इन शिपमेंट्स को मंजूरी दी गई है ताकि आपूर्ति बाधित न हो।
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भारतीय रिफाइनरियों ने शुरू की तैयारी
उद्योग सूत्रों के मुताबिक भारत की बड़ी सरकारी रिफाइनरियां- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड रूसी कच्चे तेल की तत्काल डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स के साथ बातचीत कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार भारतीय सरकारी रिफाइनरियां अब तक ट्रेडर्स के जरिए लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल की खरीद पूरी कर चुकी हैं। खास तौर पर एचपीसीएल और एमआरपीएल के लिए यह महत्वपूर्ण वापसी मानी जा रही है, क्योंकि इन कंपनियों ने पिछली बार नवंबर में रूसी कच्चा तेल खरीदा था।
छूट खत्म, अब प्रीमियम पर मिल रहा तेल
तेल कारोबारियों के अनुसार बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले तक रूसी यूराल्स कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों को भारी छूट पर मिल रहा था, लेकिन अब कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाली रूसी तेल की खेपें अब ब्रेंट क्रूड के मुकाबले करीब 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर ऑफर की जा रही हैं। यह स्थिति फरवरी से बिल्कुल अलग है, जब संघर्ष शुरू होने से पहले भारत को लगभग 13 डॉलर प्रति बैरल तक की बड़ी छूट मिल रही थी।
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