‘रूस से तेल खरीदते रहेंगे, जहां सस्ता मिलेगा, वहीं से लेंगे…’ ट्रंप के टैरिफ पर भारत का करारा जवाब
मॉस्को: रोजमर्रा की जिंदगी में जब गैस की कीमतें बढ़ती हैं या पेट्रोल-डीजल की मार झेलनी पड़ती है, तब हममें से कई लोग सोचते हैं कि आखिर इसका हल क्या है? ऐसे में जब भारत जैसे विशाल देश की सरकार सस्ते तेल के लिए ठोस कदम उठाती है, तो ये न सिर्फ आम लोगों के लिए राहत की बात होती है, बल्कि ये देश की आर्थिक मजबूती की भी एक मिसाल बन जाती है। रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के दबाव और टैरिफ जैसे फैसलों के बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वो अपने नागरिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
भारत की प्राथमिकता: अपने लोगों की ऊर्जा सुरक्षा
रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दो टूक शब्दों में कहा कि भारत सस्ता और भरोसेमंद तेल वहीं से खरीदेगा, जहां से उसे सबसे बेहतर सौदा मिलेगा। उनका साफ कहना था कि भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, और इसमें कोई भी राजनीतिक दबाव आड़े नहीं आएगा।
आज के दौर में जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर हैं, तब रूस जैसे सहयोगी देश से सस्ते दामों पर तेल खरीदना भारत की ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा बन गया है। इससे न केवल देश को आर्थिक फायदा होता है, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी बोझ कम पड़ता है।
अमेरिका के टैरिफ को भारत ने बताया अनुचित
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला, जो 27 अगस्त से लागू होगा, भारत को मंजूर नहीं है। इससे पहले भी जुलाई में ट्रंप प्रशासन भारत पर 25% टैरिफ लगा चुका है, जिससे कुल मिलाकर अब भारतीय सामान पर अमेरिका में 50% तक टैरिफ देना होगा।
राजदूत विनय कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला पूरी तरह अनुचित और बेबुनियाद है। भारत हमेशा से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार की स्थिरता में योगदान देता रहा है। अमेरिकी आरोपों और टैरिफ से भारत पीछे नहीं हटेगा, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।
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रूसी तेल पर भारत को मिल रहा सीधा फायदा
20 अगस्त को रूस के डिप्लोमैट रोमन बाबुश्किन ने बताया कि भारत को रूस से कच्चे तेल पर लगभग 5% की छूट मिल रही है। यह छूट भारत को तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद राहत देती है।
युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2% तेल खरीदता था, लेकिन 2023 तक यह आंकड़ा 45% तक पहुंच गया। 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत ने रोजाना औसतन 17.8 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है। पिछले दो वर्षों में भारत ने हर साल 130 अरब डॉलर से अधिक का तेल रूस से आयात किया है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि रूस अब भारत का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार बन चुका है।
ट्रंप प्रशासन के आरोपों पर भारत का सख्त रुख
ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत पर रूस से सस्ता तेल खरीदकर मुनाफा कमाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि भारतीय कंपनियां इस तेल को रिफाइन कर महंगे दाम पर दुनियाभर में बेचती हैं, जिससे रूस को युद्ध के लिए फंड मिलता है और भारत फायदा कमाता है।
लेकिन भारत ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है। भारत का कहना है कि यह व्यापार पूरी तरह पारदर्शी और वैश्विक ऊर्जा बाजार के नियमों के मुताबिक है। साथ ही, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में रूस दौरे के दौरान साफ कहा कि रूस से सबसे ज्यादा तेल चीन खरीद रहा है, न कि भारत।
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