नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन इस बार निशाने पर है भारत। उन्होंने भारत और रूस के बीच बढ़ते रिश्तों और आर्थिक सहयोग को लेकर तीखा बयान देते हुए दावा किया कि ये दोनों देश अपनी “कमजोर अर्थव्यवस्थाओं” को साथ लेकर डुबा सकते हैं। ट्रंप के इस बयान ने भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में एक नई खटास डाल दी है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भारत को लेकर न केवल आलोचनात्मक टिप्पणी की, बल्कि यह भी इशारा किया कि भारत की आर्थिक हैसियत उस मुकाम पर नहीं है जिसे वह दिखाने की कोशिश करता है। मगर हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
भारत दुनिया की सबसे आशावादी अर्थव्यवस्था
भारत को आज कोई भी उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक अग्रसर विकासशील शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, OECD और एशियाई विकास बैंक जैसी तमाम वैश्विक संस्थाएं भारत के विकास की तारीफ कर रही हैं।
IMF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 और 2026 में क्रमशः 6.4% की आर्थिक विकास दर दर्ज कर सकता है। यह आंकड़ा अमेरिका सहित कई विकसित देशों से कहीं बेहतर है, जिनकी अर्थव्यवस्थाएं इस समय विकास के बजाय स्थिरता की ओर झुकी हुई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की गलतफहमी
डोनाल्ड ट्रंप को शायद यह लगने लगा है कि बिना अमेरिका के सहयोग के भारत वैश्विक मंच पर आगे नहीं बढ़ सकता, लेकिन वास्तविकता में भारत आज एक ऐसा बाज़ार है जिसे कोई भी देश नजरअंदाज नहीं कर सकता।
भारत में तकनीकी उत्पादों, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेवाओं की बहुत बड़ी खपत है। अमेरिका की दिग्गज कंपनियों जैसे Apple, Microsoft, Google आदि को भारत से सालाना अरबों डॉलर की कमाई होती है। अगर कभी भारतीय उपभोक्ता “स्वदेशी अपनाओ” जैसी मुहिम पर उतर आएं, तो इन कंपनियों के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
युवा भारत- भविष्य की ताकत
भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा आबादी है। जहां विकसित देशों की औसत आयु 40 के पार जा चुकी है, वहीं भारत की औसत आयु 2024 में केवल 28.8 साल रही। यह युवा शक्ति भारत को तकनीकी, वैज्ञानिक और आर्थिक मोर्चे पर लगातार आगे ले जा रही है।
E&Y इंडिया के नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव के अनुसार, “भारत न केवल तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था है, बल्कि यह वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बन चुका है।”
भारत 2047 तक बन सकता है विकसित देश
भारत सरकार ने 2047 तक देश को एक “विकसित राष्ट्र” बनाने का लक्ष्य तय किया है – और इसके लिए आधार भी मजबूत किए जा चुके हैं। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएं देश को आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित बना रही हैं।
IMF और विश्व बैंक दोनों ही भारत की नीति और सुधारों की सराहना कर चुके हैं। IMF की फरवरी 2025 की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि भारत की आर्थिक रणनीति और निवेश-प्रोत्साहन पहल वैश्विक मानकों पर खरा उतरती है।
ट्रंप को भारत-रूस रिश्तों से समस्या क्यों?
भारत हमेशा से एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता रहा है। रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक रक्षा और ऊर्जा संबंध हैं, और ये रिश्ते किसी एक देश की नाराजगी से खत्म नहीं होते। ट्रंप का यह कहना कि भारत और रूस “डूबती अर्थव्यवस्थाएं” हैं, तथ्यों की पूरी तरह अनदेखी करता है।
भारत अपने रणनीतिक फैसलों को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार लेता है, न कि किसी बाहरी दबाव में। भारत-रूस सहयोग रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में जारी है, और इसमें अमेरिका जैसी तीसरी शक्ति की दखलंदाजी की कोई जरूरत नहीं।
टेक्नोलॉजी, स्पेस और एआई में भारत की धमक
भारत आज केवल पारंपरिक अर्थव्यवस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह हाई-टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
ISRO की सफल अंतरिक्ष परियोजनाएं, चंद्रयान और गगनयान मिशन, भारत के वैज्ञानिक कौशल का प्रमाण हैं। इसके साथ ही भारत के स्टार्टअप और एआई इनोवेशन हब दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
डिफेंस और रणनीतिक क्षमता- भारत की नई पहचान
भारत अब केवल वैश्विक बाजार नहीं, बल्कि एक सैन्य ताकत के रूप में भी खुद को स्थापित कर रहा है। “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे हालिया सैन्य अभियानों से भारत ने यह दिखा दिया है कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
डिफेंस टेक्नोलॉजी, स्वदेशी हथियार उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की बदौलत भारत का डिफेंस सेक्टर अभूतपूर्व तरीके से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।