India Gold Reserves: भारतीय महिलाओं के पास है सबसे ज्यादा सोना, घरों में छिपा है $5 ट्रिलियन का खजाना

India Gold Reserves: भारतीय महिलाओं के पास है सबसे ज्यादा सोना, घरों में छिपा है $5 ट्रिलियन का खजाना
India Gold Reserve

India Gold Reserves: भारत की अर्थव्यवस्था में एक ऐसा विशाल खजाना छिपा है, जो अगर मुख्यधारा में आ जाए तो देश की वित्तीय तस्वीर ही बदल सकती है। यह खजाना किसी विदेशी बैंक में नहीं, बल्कि भारतीय घरों की अलमारियों, लॉकरों और तिजोरियों में बंद है। ताजा अनुमानों के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास करीब 35,000 टन सोना मौजूद है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर आंकी जा रही है।

मॉर्गन स्टेनली की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि यह दुनिया में निजी हाथों में मौजूद सबसे बड़े गोल्ड स्टॉक में से एक है और हर साल इसमें इजाफा हो रहा है।

35,000 टन सोना: आंकड़े जो चौंकाते हैं

अगर तुलना की जाए तो दुनिया का मशहूर जहाज टाइटैनिक करीब 22,000 टन भार ढो सकता था, लेकिन वह भी भारतीय घरों में रखे सोने के पूरे भंडार को नहीं ले जा पाता।

साल 2000 से 2025 के बीच भारत ने आधिकारिक रूप से 700 टन से अधिक सोना आयात किया, जिसकी कीमत 500 अरब डॉलर से ज्यादा रही। अगर इसमें तस्करी के जरिए आया सोना और यात्रियों द्वारा लाए गए गहने जोड़ दिए जाएं, तो कुल आयात बिल 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच जाता है।

औपचारिक सिस्टम से बाहर सबसे बड़ा धन

भारतीय घरों में रखा यह सोना देश की घरेलू बचत का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन यह औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर है।

  • इसका बड़ा हिस्सा न तो निवेश में इस्तेमाल हो रहा है
  • न ही इससे सरकार को टैक्स मिल रहा है
  • और न ही यह अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ा रहा है

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, यह सोना एक तरह से समानांतर अर्थव्यवस्था में फंसा हुआ है, जिसे मुख्यधारा में लाना अब समय की मांग बन चुका है।

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सोना बाहर आया तो क्या-क्या फायदे होंगे?

अगर इस निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक सिस्टम में लाया जाए, तो इसके चार बड़े फायदे सामने आ सकते हैं।

सरकार को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व

सोने के मुख्यधारा में आने से सरकार को बड़ा टैक्स लाभ मिल सकता है। इससे 8वें वेतन आयोग जैसी योजनाओं और बड़े सार्वजनिक खर्चों को बिना नया कर्ज लिए पूरा किया जा सकेगा।

बाजार में बढ़ेगी नकदी

सोना बेचने या गिरवी रखने से आम लोगों और कारोबारियों के हाथों में नकद आएगा, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और खपत को रफ्तार मिलेगी।

RBI की बैलेंस शीट होगी मजबूत

अगर यह सोना रिजर्व बैंक के पास पहुंचे, तो भारत की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और विदेशी पूंजी पर निर्भरता घटेगी।

विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल

सोना आधिकारिक रिजर्व का हिस्सा बनने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी कर्ज से कहीं अधिक हो सकता है, जिससे देश की सॉवरेन रेटिंग बेहतर होने की संभावना बनेगी।

मौजूदा रास्ते क्यों नहीं हैं कारगर?

सरकार के सामने इस सोने को सिस्टम में लाने के दो पारंपरिक विकल्प हैं, लेकिन दोनों में खामियां हैं।

पहला तरीका है एमनेस्टी स्कीम, जिसमें सोने की घोषणा पर करीब 30% टैक्स लगे। लेकिन ऐसी योजना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिल सकती है और लोगों को टैक्स भरने के लिए नकदी की व्यवस्था करनी होगी।

दूसरा तरीका है बैंकों और NBFCs को सोने के बदले लोन देने की छूट देना, बिना स्रोत पूछे। इससे सोना अस्थायी रूप से सिस्टम में आएगा, लेकिन सरकार को सीधा राजस्व नहीं मिलेगा और लोन चुकते ही सोना फिर बाहर चला जाएगा।

RBI की नई चाल: गेम चेंजर फॉर्मूला

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, सबसे प्रभावी समाधान हो सकता है RBI द्वारा विशेष गोल्ड बायबैक प्रोग्राम।

इस योजना के तहत:

  • RBI किसी भी नागरिक से अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव पर सोना खरीदे
  • भुगतान दो हिस्सों में हो
  • 65% रकम तुरंत नकद
  • 35% शून्य-कूपन सरकारी बॉन्ड के रूप में, जिसकी मैच्योरिटी 29 साल हो

कागजों में बेचने वाले को सोने का 100% दाम मिलेगा, लेकिन क्योंकि 35% भुगतान ब्याज-रहित और लंबी अवधि का होगा, RBI के लिए इसकी वास्तविक लागत लगभग 70% ही होगी।

बिना सवाल पूछे, अप्रत्यक्ष टैक्स

इस मॉडल में सोना बेचने वाला व्यक्ति बिना सीधे टैक्स चुकाए, अप्रत्यक्ष रूप से करीब 30% टैक्स दे देता है।

  • न सोने के स्रोत पर सवाल
  • न कानूनी जोखिम
  • और न ही मानसिक डर

यही वजह है कि इसे मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद असरदार रणनीति माना जा रहा है।

सरकार और अर्थव्यवस्था को क्या मिलेगा?

राजस्व में बड़ा उछाल

अगर RBI 100 अरब डॉलर मूल्य का सोना 70% प्रभावी लागत पर खरीदता है, तो करीब 30 अरब डॉलर का लाभ होगा। यह लाभांश सरकार को दिया जा सकता है, जिससे 60 से 120 अरब डॉलर तक का फंड जुट सकता है।

बाजार में असली पैसा

कारोबारियों और निवेशकों के हाथों में नकद और बॉन्ड आएंगे, जो विस्तार, निवेश और खपत को बढ़ावा देंगे।

विदेशी कर्ज पर निर्भरता घटेगी

सोने के रूप में मजबूत रिजर्व भारत की सॉवरेन रेटिंग सुधारने में मदद करेगा और विदेशी झटकों से सुरक्षा देगा।

चालू खाते को राहत

घरेलू मांग को RBI अपने सोने के भंडार से पूरा कर सकेगा, जिससे आयात घटेगा और चालू खाता घाटा कम होगा।

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