India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Deal) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि दोनों देश एक “बहुत खास समझौते” के करीब हैं, जो आने वाले समय में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ट्रंप ने कहा- भारत पर टैरिफ कम करेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान सर्जियो गोर के भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ एक समझौते के बहुत करीब हैं। यह समझौता पहले से बिल्कुल अलग होगा। वे (भारत) बहुत अच्छे वार्ताकार हैं। हमें एक अच्छी डील मिल रही है और मुझे पूरा विश्वास है कि यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगी।”
समारोह के बाद ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह भी कहा, “भारत पर अभी टैरिफ बहुत ज्यादा हैं, खासकर ऊर्जा और तेल आयात के मामले में। लेकिन किसी भी समय हम इसे कम करने जा रहे हैं। भारत ने अब रूसी तेल की खरीद कम कर दी है और स्थिति में सुधार हो रहा है।”
टैरिफ में बड़ी राहत की तैयारी
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, नई ट्रेड डील के तहत भारत पर लागू लगभग 50% तक के इंपोर्ट टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सकता है। इसका सीधा असर उन उत्पादों पर पड़ेगा जिन पर अब तक अमेरिका और भारत दोनों ओर से ऊंचे शुल्क लगाए जाते रहे हैं, जैसे —
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
- कृषि उत्पाद
- ऊर्जा आयात (तेल व गैस)
- दवा और फार्मास्युटिकल सामान
- रक्षा और एयरोस्पेस उत्पाद
यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में संतुलन लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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भारत की तरफ से क्या कहा गया?
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में संकेत दिए थे कि भारत-अमेरिका के बीच बातचीत “बेहद सकारात्मक दिशा” में बढ़ रही है। उन्होंने कहा था, “बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। कई संवेदनशील मुद्दे हैं जिन पर संतुलन बनाना जरूरी है, इसलिए प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। लेकिन हम इस डील को जल्द से जल्द फाइनल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
गोयल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच अब तक पांच दौर की वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं। इन चर्चाओं का लक्ष्य 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत तक समझौते पर हस्ताक्षर करना है।
नई ट्रेड डील के मुख्य बिंदु
नई ट्रेड डील को लेकर जो मसौदा तैयार हुआ है, उसमें कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं:
- टैरिफ में कमी: दोनों देशों में आयात शुल्क को 40-50% तक घटाने का रोडमैप।
- टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट सहयोग: अमेरिकी टेक कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने की अनुमति और आसान वीजा नीति।
- ऊर्जा सुरक्षा समझौता: भारत को अमेरिका से LNG और कच्चे तेल के निर्यात में रियायतें।
- फार्मा और हेल्थ सेक्टर: दवा उद्योग में संयुक्त अनुसंधान और एक्सपोर्ट प्रोत्साहन योजनाएं।
- डिजिटल व्यापार ढांचा: ई-कॉमर्स और डेटा ट्रांसफर के लिए पारदर्शी नियम तय करना।
सितंबर में अमेरिका दौरे पर गए थे गोयल
सितंबर 2025 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका गए थे। वहां उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के साथ “ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क एग्रीमेंट” (TIFA) पर चर्चा की। बैठक में भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल और अमेरिका की ओर से ब्रेंडन लिंच, सहायक व्यापार प्रतिनिधि (South & Central Asia) मौजूद थे।
दोनों देशों ने बैठक के बाद साझा बयान में कहा था कि “भारत-अमेरिका व्यापार संबंध नई ऊंचाई पर हैं और दोनों सरकारें इस डील को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
ट्रेड वॉल्यूम दोगुना करने का लक्ष्य
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच सालाना व्यापार 191 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है। नई डील के तहत दोनों देश इस व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं।
डील के पहले चरण पर हस्ताक्षर होने के बाद निवेश, निर्यात, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत को अमेरिकी बाजारों तक अधिक पहुंच मिलेगी और अमेरिका को भारत में उत्पादन एवं सप्लाई चेन का भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
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