Dangerous Mobile Games: गाजियाबाद में तीन बहनों निशिका, प्राची और पाखी के सुसाइड केस के बाद कुछ मोबाइल गेम्स को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। पुलिस जांच में इन गेम्स का जिक्र उनकी डायरी और सुसाइड नोट में बार-बार मिला, जहां उन्होंने इन्हें अपने पसंदीदा गेम बताया था। ये सभी गेम हॉरर और सर्वाइवल-पजल कैटेगरी के हैं, जिनमें डर, हिंसा और डिस्टर्ब करने वाले सीन होते हैं।
पुलिस और शिक्षा विभाग ने इन गेम्स को बच्चों के लिए नुकसानदेह बताते हुए इन्हें लेकर चेतावनी दी है और बैन की सिफारिश भी की है। खास बात यह है कि ये गेम 10–12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सही नहीं माने जाते, फिर भी मोबाइल पर आसानी से मिल जाने के कारण बच्चे इन्हें खेल रहे हैं। इनमें तेज आवाज वाले जंप-स्केयर, डरावने सीन और डार्क थीम्स होती हैं, जो बच्चों के मन और मानसिक सेहत पर असर डाल सकती हैं। जब बच्चा इन गेम्स में ज्यादा डूब जाता है, तो वह असल दुनिया से कटने लगता है, जो चिंता की बड़ी वजह है।
Poppy Playtime: खिलौनों की फैक्ट्री में डर का खेल
यह एक फर्स्ट-पर्सन पजल-हॉरर गेम है। कहानी एक बंद पड़ी टॉय फैक्ट्री में घूमती है, जहां खिलाड़ी को डरावने एनिमेटेड खिलौनों से बचते हुए पहेलियां सुलझानी होती हैं। इसमें अंधेरा माहौल, खून के छींटों जैसे विजुअल और अचानक डराने वाले सीन दिखते हैं।
यह गेम आमतौर पर 12+ या टीन एज के लिए रेटेड है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए काफी डरावना माना जाता है। इसके डाउनलोड लाखों में हैं और कुछ वर्जन पेड भी हैं। बच्चों में खिलौनों से डर बैठ जाना और बार-बार डर लगने जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
The Baby in Yellow: बेबीसिटिंग के नाम पर हॉरर
इस गेम में खिलाड़ी एक बेबीसिटर होता है, जो एक बच्चे की देखभाल करता है। शुरुआत में सब सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे पैरानॉर्मल घटनाएं होने लगती हैं। डरावनी आवाजें, अचानक होने वाले सीन और बच्चे के अजीब हाव-भाव इसे और ज्यादा खौफनाक बनाते हैं।
कुछ प्लेटफॉर्म पर इसकी रेटिंग 9+ या 12+ दिखाई जाती है, लेकिन हॉरर कंटेंट के कारण विशेषज्ञ इसे 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ठीक नहीं मानते। मोबाइल पर इसके 10 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हैं। चिंता यह है कि इससे बच्चों के मन में छोटे बच्चों और केयर से जुड़ी चीजों को लेकर डर पैदा हो सकता है।
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Evil Nun: स्कूल में पीछा करती डरावनी नन
यह गेम एक स्कूल के माहौल में सेट है, जहां एक खतरनाक नन बच्चों को पकड़ने की कोशिश करती है। खिलाड़ी को छिपते हुए, रास्ते खोजते हुए और पहेलियां हल करके बाहर निकलना होता है।
इसकी रेटिंग कई जगह PEGI 16 या मैच्योर बताई गई है। इसमें डर और हिंसा से जुड़े सीन हैं। इसके डाउनलोड करोड़ों में हैं। स्कूल और टीचर जैसी जगहों को डर से जोड़ देना बच्चों के मन पर गलत असर डाल सकता है।
Ice Scream: बच्चों के अपहरण की कहानी
इस गेम में एक आइसक्रीम बेचने वाला किरदार बच्चों को अगवा कर लेता है। खिलाड़ी को छिपकर, सुराग ढूंढकर बच्चों को बचाना होता है।
यह गेम 13+ या टीन एज के लिए बताया जाता है। कार्टून जैसे ग्राफिक्स होने के बावजूद इसकी कहानी और माहौल डर पैदा करता है। करोड़ों बच्चों ने इसे डाउनलोड किया है। अपहरण जैसी थीम बच्चों में असली दुनिया का डर बढ़ा सकती है।
माता-पिता क्या करें?
इन सभी गेम्स की पहुंच आसान है और कई बार ये फ्री या कम कीमत में मिल जाते हैं। असली समस्या तब होती है जब बच्चे घंटों इनकी दुनिया में खोए रहते हैं, यूट्यूब पर इनके वीडियो देखते हैं और धीरे-धीरे असल जिंदगी से दूरी बनाने लगते हैं, जैसा कि गाजियाबाद केस में देखने को मिला।
माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल्स ऑन रखें, गेम डाउनलोड करने से पहले उसकी एज रेटिंग देखें और खेलने का समय तय करें। अगर बच्चा ज्यादा चुप रहने लगे, डरा हुआ दिखे या अकेले रहने लगे, तो समय रहते उससे बात करें और जरूरत पड़े तो काउंसलर की मदद लें।
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