Gautam Gambhir: भारतीय टेस्ट टीम हाल के महीनों में जिस प्रकार धराशायी हुई है, उसने पूरी क्रिकेट बिरादरी को चौंका दिया है. कभी घर में अजेय रहने वाली टीम इंडिया अब लगातार हार का सामना कर रही है.
पहले न्यूजीलैंड ने भारत को मात दी और अब साउथ अफ्रीका ने भी श्रृंखला पर कब्ज़ा कर लिया. इन हारों के बाद टीम प्रबंधन पर सवालों की बौछार हो रही है, विशेषतः कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के फैसलों पर.
स्टार कल्चर खत्म करने की नीति उलटी पड़ी (Gautam Gambhir)
गौतम गंभीर शुरुआत से ही यह मानते रहे कि भारतीय टीम किसी एक स्टार पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए. उनका कहना रहा है कि जीत 11 खिलाड़ियों की मेहनत होती है, न कि किसी एक नाम के दम पर. लेकिन जब से वे मुख्य कोच बने, उनकी यह सोच टीम के संतुलन को प्रभावित करती दिखी.
वरिष्ठ खिलाड़ियों को धीरे-धीरे बाहर करने और टीम को नए सिरे से आकार देने की उनकी रणनीति ने भारतीय टेस्ट लाइनअप को अस्थिर कर दिया.
रोहित-विराट-अश्विन के संन्यास ने टीम की रीढ़ तोड़ी
रोहित शर्मा, विराट कोहली और आर. अश्विन—तीनों ने लगभग एक ही दौर में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया. इन खिलाड़ियों के जाने से टीम का अनुभव, स्थिरता और समझ अचानक गायब हो गई.
हालांकि तीनों ने अपने-अपने कारण बताए, लेकिन क्रिकेट जगत में यह भी चर्चा रही कि टीम प्रबंधन का कड़ा रवैया और लगातार दबाव इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह थी. भारतीय टेस्ट टीम पिछले दशक में इन खिलाड़ियों के दम पर विश्व क्रिकेट में शीर्ष पर रही थी. उनके हटते ही टीम की कमान कम अनुभवी खिलाड़ियों पर आ गई, जिससे प्रदर्शन गिर गया.
घरेलू जमीन पर शर्मनाक हारें (Gautam Gambhir)
न्यूजीलैंड के खिलाफ क्लीन स्वीप के बाद उम्मीद थी कि भारत साउथ अफ्रीका के सामने वापसी करेगा. पर हुआ इसका उल्टा. पहले कोलकाता टेस्ट में 124 रनों का लक्ष्य नहीं chased हुआ और फिर गुवाहाटी टेस्ट में 408 रन की करारी हार ने क्रिकेट इतिहास में भारत की सबसे खराब घरेलू हारों में एक और अध्याय जोड़ दिया. भारतीय टीम की बल्लेबाज़ी बिखरी हुई दिखी, गेंदबाजी में धार नहीं रही और फैसलों ने मैच को और मुश्किल बना दिया.
चयन में प्रयोग और विवाद (Gautam Gambhir)
टीम चयन भी विवादों के घेरे में है. घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाने वाले सरफराज खान लगातार बाहर बैठे हैं. फिटनेस पर काम कर 10 किलो वजन घटाने के बावजूद उन्हें मौका नहीं दिया गया. इसके विपरीत कम अनुभवी खिलाड़ियों को महत्वपूर्ण बल्लेबाजी क्रम सौंप दिया गया. वाशिंगटन सुंदर और साई सुदर्शन को तीसरे नंबर पर भेजा गया, जबकि सरफराज का रेकॉर्ड इस पोज़िशन के लिए कहीं ज्यादा मजबूत माना जाता है. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निरंतरता की कमी का असर टीम के प्रदर्शन पर साफ दिख रहा है.
जेय रही सुपरस्टार टीम अब बिखरी हुई दिखती है
भारत की टेस्ट टीम पिछले दस सालों में जिस मजबूती और गहराई के लिए जानी जाती थी, वह अब लापता है. कोहली-रोहित-पुजारा-रहाणे-अश्विन-जडेजा जैसे खिलाड़ी भारत को घर में लगभग अजेय बनाते थे. उनकी मौजूदगी विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाती थी. अब टीम में न तो वैसी अनुभवी कॉलम बची है और न ही स्थिरता. कोच और चयनकर्ता के लगातार प्रयोगों ने टीम का आत्मविश्वास भी हिला दिया है.
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