अब नहीं होंगे ऑनलाइन ठगी के शिकार! 1930 पर कॉल करते ही फ्रीज होंगे पैसे, तैयार हुए ‘साइबर कमांडो’
Cyber Commando: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध के बीच अब सरकार ने ठगों के खिलाफ बड़ा डिजिटल अभियान शुरू कर दिया है। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी निवेश, OTP स्कैम और हनी ट्रैप जैसे मामलों से निपटने के लिए एक मजबूत सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें प्रशिक्षित ‘साइबर कमांडो’ अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हर दिन सामने आ रहे हजारों मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई बार सिर्फ एक लिंक पर क्लिक करना या अनजान कॉल उठाना ही लोगों की पूरी जमा पूंजी खत्म कर देता है। ऐसे में अब सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए तेज और केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है।
I4C के जरिए देशभर में एक्शन प्लान
साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह प्लेटफॉर्म देशभर की पुलिस, बैंक, टेलीकॉम कंपनियों और पेमेंट गेटवे को एक साथ जोड़ता है।
जैसे ही कोई शिकायत दर्ज होती है, सभी संबंधित एजेंसियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं। इसका उद्देश्य है कि साइबर ठगी को शुरुआती स्तर पर ही रोक लिया जाए और नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
1930 पर कॉल या ऑनलाइन शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड होता है तो उसे तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
शिकायत दर्ज होते ही मामला सीधे फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम में पहुंच जाता है। इसके बाद Cyber Fraud Mitigation Centre सक्रिय हो जाता है, जहां से अलग-अलग एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।
API इंटीग्रेशन के जरिए बैंक, टेलीकॉम और पेमेंट सिस्टम आपस में जुड़े होते हैं, जिससे संदिग्ध ट्रांजैक्शन को ट्रैक और फ्रीज करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है।
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आंकड़ों में दिख रहा बढ़ता खतरा
हालिया डेटा के मुताबिक, साइबर अपराध अब संगठित नेटवर्क के रूप में फैल चुका है।
10 जनवरी 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच चेक के जरिए संदिग्ध निकासी के 3,827 मामले सामने आए
- एटीएम के जरिए 43,450 संदिग्ध निकासी दर्ज हुई
- 54,869 बैंक खाते संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए गए
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा देखी गई है।
कौन हैं ‘साइबर कमांडो’
सरकार द्वारा तैयार किए गए साइबर कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित विशेषज्ञ हैं। इन्हें साइबर अपराध के नए तरीकों को समझने और उनसे निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है।
ये कमांडो डिजिटल फॉरेंसिक, नेटवर्क ट्रैकिंग और डेटा एनालिसिस में माहिर होते हैं। इनका काम साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान करना, डिजिटल सबूत जुटाना और जांच एजेंसियों को कार्रवाई में मदद देना है।
साइबर ठगी में क्या करें
विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर फ्रॉड होने पर सबसे जरूरी है तुरंत कार्रवाई करना।
- बिना देर किए 1930 पर कॉल करें
- या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
समय पर शिकायत करने से ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर पैसे फ्रीज या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है। देरी होने पर पैसा कई खातों में ट्रांसफर हो सकता है, जिससे उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है।
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