जम्मू: मानसून की बारिश इस बार उत्तर भारत के कई इलाकों में राहत नहीं, बल्कि तबाही बनकर बरसी है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में रविवार की सुबह उस वक्त मातम में बदल गई, जब अचानक बादल फटने से भारी तबाही मच गई। कई गांवों में पानी और मलबा भर गया, लोगों की चीखें गूंज उठीं और कुछ ही पलों में हंसते-खेलते घर तबाह हो गए। इन तबाही भरे पलों ने न सिर्फ लोगों की जिंदगियां छीन लीं, बल्कि कई परिवारों को बिखेर कर रख दिया।
कठुआ में बादल फटने से मातम पसरा
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में रविवार सुबह बादल फटने की घटना ने लोगों को दहला दिया। बॉर्डर से सटे इलाके में एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग जगहों पर बादल फटे- जोद घाटी, मथरे चक और बगार्ड-चंगड़ा। इनमें सबसे ज्यादा तबाही जोद घाटी में देखने को मिली, जहां 7 लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।
जोद गांव का बाकी शहर से संपर्क पूरी तरह टूट गया। घरों में कई फीट तक पानी और मलबा भर गया। घायलों को जैसे-तैसे अस्पताल तक पहुंचाया गया। कठुआ के डिप्टी एसपी राजेश शर्मा ने बताया कि लैंडस्लाइड से 2-3 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 6 लोगों के फंसे होने की सूचना भी है।
सिर्फ गांव ही नहीं, जांगलोट और अन्य इलाकों से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर भी कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है। रेलवे ट्रैक तक बाधित हो गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है। प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद कुछ इलाकों तक पहुंच बनाकर राहत कार्य शुरू किया है, लेकिन मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं।
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हिमाचल में भी बादल फटा
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला भी बादल फटने की इस भयावह त्रासदी से अछूता नहीं रहा। रविवार तड़के करीब 4 बजे कुल्लू के टकोली, पनारसा और नगवाई इलाकों में बादल फटा। देखते ही देखते मलबा बहकर घरों में घुस गया।
कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा है, टकोली फोरलेन पर मलबा आ गया, जिससे सड़कें बंद हो गईं। एफकॉन कंपनी की कॉलोनी की दीवार टूट गई, कर्मचारियों को जान बचाने के लिए भागना पड़ा। टकोली और शालानाल खड्ड में आई बाढ़ ने वहां के लोगों के सपनों को बहा दिया।
10 से ज्यादा घरों में मलबा भर गया, वहीं 10 से अधिक गाड़ियों को नुकसान हुआ है। चंडीगढ़-मनाली फोरलेन पर भी ट्रैफिक पूरी तरह रुका हुआ है। मंडी के बागी पराशर इलाके में फ्लैश फ्लड की चपेट में आकर कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
किश्तवाड़ में 65 लोगों की मौत
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 14 अगस्त को चसोटी गांव में बादल फटने से जो त्रासदी हुई, उसकी यादें अभी तक लोगों के जेहन से गई नहीं थीं कि एक और हादसा हो गया। चसोटी गांव में मलबे में दबने से अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है।
500 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है, लेकिन अभी भी करीब 200 लोग लापता हैं। घटनास्थल पर NDRF की 3 टीमें, सेना के 300 से अधिक जवान, व्हाइट नाइट कोर की मेडिकल टीम, पुलिस और SDRF के सदस्य राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
चश्मदीदों की आंखों में आज भी डर बसा हुआ है। किसी ने अपने माता-पिता को खोया है, तो किसी ने अपने बच्चों को। एक स्थानीय शख्स ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के दौरान कहा, “हमें कुछ नहीं चाहिए साहब, आप सब अपने घर ले जाओ, हमें बस हमारी डेडबॉडी दे दो… मेरी मां और मौसी लापता हैं।”
इन शब्दों ने हर उस इंसान का दिल चीर कर रख दिया, जो इस आपदा को सिर्फ एक खबर समझ रहा था।
तेज बारिश का अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर में 17 अगस्त से लेकर 19 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। जम्मू, रियासी, उधमपुर, राजौरी, पुंछ, सांबा, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और कश्मीर के कुछ हिस्सों में बादल फटने और लैंडस्लाइड की आशंका जताई गई है।
हिमाचल प्रदेश में भी चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। इस मानसून सीजन में हिमाचल में अब तक 261 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
इन हादसों से मिली सीख और सवाल
हर साल बरसात के मौसम में पहाड़ी राज्यों में इस तरह की आपदाएं सामने आती हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या हम इसके लिए तैयार हैं? क्यों नहीं समय रहते सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी प्रणाली को और मजबूत किया जाता?
आज भी कई गांवों में अलर्ट नहीं पहुंच पाता और लोग तब तक कुछ समझ पाते हैं, जब तक सबकुछ खत्म नहीं हो जाता। हमें प्राकृतिक आपदाओं को हल्के में लेना बंद करना होगा और उन लोगों की आवाज़ बनना होगा, जो हर साल इस तबाही का शिकार होते हैं।
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