China and Japan Clash: जापान ने चीन को दिखाई आंख, किया ऐसा काम…गुस्से से लाल होंगे जिनपिंग

China and Japan Clash
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China and Japan Clash: एशिया-प्रशांत में भू-राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज़ हो गई है. जापान ने पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी देश वह भी अमेरिका को एक पूरा हथियार सिस्टम निर्यात कर दिया है.

यह कदम जितना ऐतिहासिक है, उतना ही विवादित भी. चीन इस फैसले से भड़क उठा है और अब टोक्यो को उसके युद्धकालीन इतिहास और शांतिवादी संविधान की याद दिला रहा है.चीन के सरकारी मीडिया और सैन्य विशेषज्ञों ने इसे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए “गंभीर और खतरनाक संकेत” बताया है.

चीन-जापान के रिश्तों की पृष्ठभूमि और पुराना तनाव (China and Japan Clash)

जापान लंबे समय से अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है, जबकि चीन दोनों देशों के साथ कई मोर्चों पर विवाद रखता है. पूर्वी चीन सागर में द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच टकराव किसी से छुपा नहीं है. कई बार नौसैनिक जहाज़ आमने-सामने आ चुके हैं. इसके अलावा जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के ताइवान पर दिए गए बयान ने भी चीन की नाराज़गी को और गहरा किया है. ऐसे माहौल में जापान द्वारा अमेरिका को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम सौंपने का कदम बीजिंग को एक तरह से सीधी चुनौती जैसा महसूस हुआ है.

अमेरिका को जापानी मिसाइलों की ज़रूरत क्यों पड़ी? (China and Japan Clash)

क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अपने मिसाइल स्टॉक को फिर से भरने की कोशिश कर रहा है.यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने बड़े पैमाने पर हथियारों की सप्लाई की, जिससे उसके सैन्य भंडार में भारी कमी आ गई है.अब वॉशिंगटन ऐसे भरोसेमंद देशों की तलाश में है जो अमेरिकी मानकों के हथियार जल्द से जल्द बनाकर भेज सकें. जापान तकनीक और गुणवत्ता दोनों मामलों में इस जरूरत को सबसे बेहतर पूरा करता है.यही वजह है कि अमेरिका ने जापान की मिसाइलों की ओर हाथ बढ़ाया और जापान ने वर्षों बाद इस तरह के निर्यात की इजाजत दी.

जापान की बदली हुई शांति नीति (China and Japan Clash)

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के हथियार निर्यात पर सख्त सीमाएं थीं.उसकी डिफेंस इक्विपमेंट एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की तीन गाइडलाइंस हथियारों के निर्यात पर लगभग रोक लगाती थीं.लेकिन चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने जापान को अपनी नीति में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया.2023 में एक बड़ा संशोधन किया गया, जिसके बाद अमेरिका को जापान में निर्मित पैट्रियट मिसाइलों की सप्लाई की इजाजत मिल गई. यह बदलाव जापान की रणनीतिक सोच में बड़े परिवर्तन का संकेत है.

चीन के आरोप और जापान का जवाब

चीन लगातार आरोप लगाता रहा है कि जापान अपने युद्धकालीन इतिहास को छिपाता है, शांतिवादी संविधान को कमजोर कर रहा है और नॉन-न्यूक्लियर पॉलिसी को तोड़ने की कोशिश कर रहा है.बीजिंग का कहना है कि मिसाइल निर्यात क्षेत्र के लिए अस्थिरता का कारण बन सकता है.हालांकि, जापान का तर्क है कि यह निर्णय उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है. उसके अनुसार, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों की गतिविधियां उसे तय सीमाओं से आगे सोचने पर मजबूर कर रही हैं.

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