नई दिल्ली: मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में समुद्री गतिविधियां तेज़ी से बदल रही हैं। दुनिया की दो प्रमुख सैन्य ताकतें अमेरिका और भारत अब समुद्रों में अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं। इस बदलाव की पृष्ठभूमि में रूस की धमकियां, चीन की आक्रामकता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारक हैं।
जहां अमेरिका ने हाल ही में दो परमाणु पनडुब्बियों को गुप्त लोकेशन पर भेजा है, वहीं भारत ने भी दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाते हुए वहां तीन अग्रणी युद्धपोत तैनात किए हैं। ये घटनाक्रम भारत की समुद्री नीति में एक अहम मोड़ का संकेत देते हैं कि भारत अब सिर्फ अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री स्थिरता में भी एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
अमेरिका की यह ताजा सैन्य पहल सीधे तौर पर रूस से जुड़े तनाव के चलते सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तत्कालीन) ने घोषणा की थी कि रूस की धमकियों को देखते हुए दो न्यूक्लियर-सक्षम पनडुब्बियों को एक अज्ञात समुद्री क्षेत्र में भेजा गया है। यह कदम रूस को एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत देने के रूप में देखा जा रहा है कि अमेरिका अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं करेगा, बल्कि सक्रिय सैन्य उपस्थिति से जवाब देगा।
भारत का सामरिक विस्तार: समुद्र में शक्ति प्रदर्शन
भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी समुद्री गतिविधियों को तेजी से बढ़ाया है। हाल के दिनों में भारतीय नौसेना के तीन युद्धपोत- INS दिल्ली, INS किलटन और INS शक्ति फिलीपींस के बंदरगाह पर पहुंचे। यह तैनाती सिर्फ एक सामान्य दौरा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश है कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता और चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए तैयार है।
INS दिल्ली
भारत का यह गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर दुश्मन के जहाजों को बहुत कम समय में नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह नौसेना के सबसे उन्नत विध्वंसक जहाजों में से एक है।
INS किलटन
यह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) कॉर्वेट जहाज है, जिसे विशेष रूप से पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
INS शक्ति
भारतीय नौसेना का यह फ्लीट टैंकर लंबी दूरी के अभियानों में अन्य जहाजों को ईंधन और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति करता है, जिससे नौसेना की समुद्री क्षमता और रेंज बढ़ती है।
फिलीपींस में नौसैनिक साझेदारी का विस्तार
इन जहाजों की अगुवाई ईस्टर्न फ्लीट के कमांडर रियर एडमिरल सुशील मेनन कर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि भारत और फिलीपींस दोनों हिंद-प्रशांत में स्थिरता, कानून के शासन और समुद्री सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत के इस कदम का उद्देश्य फिलीपींस जैसे मित्र देशों को यह आश्वासन देना भी है कि भारत इस क्षेत्र में न केवल कूटनीतिक रूप से, बल्कि सैन्य रूप से भी उनकी सुरक्षा के लिए साथ खड़ा है।
यह दौरा उस वक्त हो रहा है जब भारत और फिलीपींस अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, और इसके मद्देनज़र फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर 4 से 8 अगस्त तक भारत की राजकीय यात्रा पर आ रहे हैं।
सिम्बेक्स: सिंगापुर के साथ संयुक्त अभ्यास
भारत का एक और युद्धपोत INS सतपुड़ा, इस समय सिंगापुर में ‘सिम्बेक्स’ (SIMBEX) नामक द्विपक्षीय अभ्यास में भाग ले रहा है। यह अभ्यास भारतीय और सिंगापुर की नौसेनाओं के बीच 32 वर्षों से जारी एक सामरिक साझेदारी का प्रतीक है।
इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्र में संचार, संयुक्त ऑपरेशन, समुद्री सुरक्षा और रणनीति से जुड़े अभ्यास करती हैं। इसका उद्देश्य है कि किसी भी संकट या संघर्ष की स्थिति में दोनों सेनाएं साथ मिलकर प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सकें।
भारत-फिलीपींस पहला संयुक्त अभ्यास
एक और अहम विकास यह है कि भारत और फिलीपींस पहली बार दक्षिण चीन सागर में एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने जा रहे हैं। यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब इस क्षेत्र में चीन लगातार सैन्य निर्माण और समुद्री दावों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत की उस नीति को मजबूती देता है जिसमें वह ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) के सिद्धांत के तहत समुद्री स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।
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