Bihar Cabinet Ministers: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन की बड़ी जीत के बाद पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को नई सरकार का शपथ ग्रहण हुआ। इस समारोह में नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री के साथ कुल 26 नए मंत्रियों को भी कैबिनेट में शामिल किया गया। इस टीम में सामाजिक संतुलन को बनाए रखने का स्पष्ट प्रयास दिखाई देता है, चाहे वह सवर्ण समाज हो, पिछड़े वर्ग हों या दलित और अल्पसंख्यक।
जातिवार प्रतिनिधित्व: किस समाज से कितने मंत्री
नई कैबिनेट में शामिल मंत्रियों का जातिगत संतुलन नीचे दिए अनुसार है:
स्पष्ट है कि एनडीए ने लगभग हर प्रमुख जातीय समूह को कैबिनेट में स्थान देकर राजनीतिक समीकरणों को संतुलित रखने की रणनीति अपनाई है।
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मंत्रियों की पूरी सूची: पार्टी, नाम, जाति और जिला
नीचे मंत्रियों की विस्तृत सूची दी गई है, जिसे राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- सम्राट चौधरी, कुशवाहा – मुंगेर
- विजय सिन्हा, भूमिहार – लखीसराय
- दिलीप जायसवाल, वैश्य – किशनगंज
- मंगल पांडे, ब्राह्मण – सिवान
- नितिन नवीन, कायस्थ – पटना
- सुरेंद्र मेहता, कुशवाहा – बेगूसराय
- संजय टाइगर, राजपूत – आरा
- लखेंद्र पासवान, पासवान – वैशाली
- श्रेयसी सिंह, राजपूत – जमुई
- अरुण शंकर प्रसाद, सुधी – मधुबनी
- रामकृपाल यादव, यादव – पटना
- रमा निषाद, मल्लाह – मुजफ्फरपुर
- नारायण शाह, वैश्य/बनिया – चंपारण
- प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, अति पिछड़ा – औरंगाबाद
जनता दल यूनाइटेड (JDU)
- नीतीश कुमार, कुर्मी – नालंदा
- अशोक चौधरी, दलित – पटना
- लेसी सिंह, राजपूत – पूर्णिया
- सुनील कुमार, दलित – गोपालगंज
- विजेंद्र यादव, यादव – सुपौल
- श्रवण कुमार, कुर्मी – नालंदा
- विजय चौधरी, भूमिहार – समस्तीपुर
- मदन साहनी, निषाद – दरभंगा
- जमा ख़ान, मुस्लिम – कैमूर
LJP (RV)
- संजय पासवान, पासवान – बेगूसराय
- संजय सिंह, राजपूत – वैशाली
HAM (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा)
- संतोष कुमार सुमन, दलित (मुसहर) – गया
RLM
- दीपक प्रकाश, कुशवाहा.
समुदायवार राजनीतिक महत्व
वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व
दिलीप जायसवाल, जो वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, बीजेपी के पारंपरिक वोट आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैश्य वर्ग आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है और कई जिलों में चुनावी रूप से निर्णायक है।
कुर्मी नेतृत्व की मजबूती
कुर्मी समाज से आने वाले नीतीश कुमार और श्रवण कुमार दोनों नालंदा क्षेत्र से हैं। कुर्मी समुदाय जेडीयू का मजबूत सामाजिक आधार माना जाता है, जिसे इस बार भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।
दलित समुदाय की भागीदारी
नई कैबिनेट में दलित नेताओं को पाँच स्थान मिले हैं, जिनमें संतोष सुमन (मुसहर समुदाय) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। मुसहर बिहार के सबसे वंचित दलित समूहों में गिना जाता है, ऐसे में उनका मंत्री बनना सामाजिक समावेश का संकेत है।
सवर्ण समाज का प्रतिनिधित्व
कायस्थ समुदाय से नितिन नवीन को फिर से मंत्री बनाना इस वर्ग की राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करता है। वहीं राजपूत समाज से चार मंत्रियों की मौजूदगी दिखाती है कि एनडीए इस प्रभावशाली समूह को साधने की कोशिश में है।
ओबीसी और ईबीसी का संतुलन
कुशवाहा, यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं को भी पर्याप्त जगह दी गई है। इससे एनडीए गठबंधन का पिछड़ा वर्ग समीकरण संतुलित रखने का संदेश जाता है।
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