वॉशिंगटन डी सी/कराकस: दुनिया एक बार फिर दो देशों की सियासी जंग के मुहाने पर खड़ी है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्तों में लंबे समय से खटास रही है, लेकिन इस बार मामला कहीं ज्यादा गंभीर हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे-सीधे वेनेजुएला के तट पर तीन वॉरशिप भेजकर इस टकराव को नया मोड़ दे दिया है। इसका मकसद भले ही ड्रग्स माफिया पर शिकंजा कसना बताया जा रहा हो, लेकिन वेनेजुएला ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए पलटवार कर दिया है।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई के खिलाफ 45 लाख लड़ाकों की तैनाती कर दी है। ये वही सैनिक हैं जो मादुरो के नेतृत्व में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए खड़े किए गए हैं। अब सवाल उठता है कि ये सिर्फ ड्रग्स के खिलाफ जंग है या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक और रणनीतिक साजिश भी छिपी है?
अमेरिका का ड्रग्स माफिया से निपटने की तैयारी
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेनेजुएला लंबे समय से ड्रग तस्करी का अड्डा बना हुआ है और वहां की सरकार भी इस पूरे नेटवर्क में शामिल है। अमेरिका के मुताबिक, राष्ट्रपति मादुरो खुद एक ड्रग कार्टेल के सरगना हैं, जो कोकीन जैसी खतरनाक नशीली दवाओं को अमेरिका तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
इसी खतरे से निपटने के लिए अमेरिका ने तीन शक्तिशाली युद्धपोत USS ग्रेवली, USS जेसन डनहम और USS सैम्पसन वेनेजुएला के तट के पास भेज दिए हैं। ये युद्धपोत हवा, समुद्र और पनडुब्बी से होने वाले हर हमले से निपटने में सक्षम हैं। इनके साथ 4,000 सैनिक, एक खतरनाक पोसाइडन एयरक्राफ्ट और एक हमलावर पनडुब्बी भी तैनात की गई है।
वेनेजुएला की प्रतिक्रिया: संप्रभुता पर हमला नहीं सहेंगे
अमेरिका की इस घेराबंदी के बाद वेनेजुएला सरकार ने इसे सीधे-सीधे अपने अस्तित्व पर हमला बताया है। राष्ट्रपति मादुरो ने कहा कि वेनेजुएला किसी भी बाहरी ताकत के सामने झुकेगा नहीं। उन्होंने सेना को अलर्ट पर रखते हुए 45 लाख सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया है।
विदेश मंत्री यवान गिल ने अमेरिका के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ट्रंप सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए वेनेजुएला को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा, “हम एक शांतिप्रिय और संप्रभु देश हैं, और किसी भी धमकी या दबाव में आने वाले नहीं हैं।”
मादुरो पर इनाम: ट्रंप की खुली जंग
ट्रंप प्रशासन ने मादुरो को ड्रग माफिया का बड़ा खिलाड़ी करार देते हुए उन पर 435 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है। पहले यह राशि 217 करोड़ थी, लेकिन अगस्त 2025 में इसे दोगुना कर दिया गया।
इतना ही नहीं, अमेरिका ने मादुरो की 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली है, जिसमें दो प्राइवेट जेट्स भी शामिल हैं। उन पर न्यूयॉर्क की एक अदालत में नार्को-आतंकवाद और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप भी लगे हैं, जो 2020 से चल रहे हैं।
यह स्पष्ट संकेत है कि ट्रंप ने अब मादुरो के खिलाफ खुली जंग छेड़ दी है सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर भी।
ड्रग्स माफिया को आतंकी संगठन का दर्जा
ट्रंप प्रशासन ने इस लड़ाई को एक नई दिशा में ले जाते हुए फरवरी 2025 में वेनेजुएला के ‘ट्रेन डी अरागुआ’, अल सल्वाडोर के ‘MS-13’, और मेक्सिको के छह बड़े ड्रग कार्टेल्स को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया।
यह वही दर्जा है जो पहले अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों को दिया जाता था। अमेरिका का मानना है कि इन गिरोहों की वजह से ना केवल अमेरिका में लाखों लोग मारे गए हैं, बल्कि मानव तस्करी, फेंटानाइल तस्करी और हिंसा के जरिये अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है।
ये भी पढ़ें- भारत में बैन होंगे Dream11 जैसे फैंटेसी ऐप! ऑनलाइन गेमिंग बिल लोकसभा में पास, जानें क्या हैं नियम?
मेक्सिको का भी विरोध: अपनी संप्रभुता नहीं खोएंगे
ट्रंप ने सिर्फ वेनेजुएला को ही नहीं, बल्कि मेक्सिको की नई राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम को भी ड्रग माफिया के खिलाफ सख्ती बरतने को कहा है। लेकिन मेक्सिको ने अमेरिका को साफ-साफ शब्दों में जवाब दिया है हम अपनी सरजमीं पर अमेरिकी सेना की दखल को कभी मंजूर नहीं करेंगे।
यह बयान बताता है कि अमेरिका की “ड्रग्स के खिलाफ जंग” अब सिर्फ कानून व्यवस्था की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और भू-राजनीति का हिस्सा बन चुकी है।
क्या टकराव टल पाएगा?
अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह तनाव युद्ध में तब्दील हो सकता है। ट्रंप का आक्रामक रुख और मादुरो की जवाबी फौज तैनाती ये दिखा रही है कि दोनों ही देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
वॉरशिप के जरिए ताकत दिखाना हो या मादुरो पर इनाम का ऐलान यह सब इस बात का संकेत है कि टकराव की आग अभी और भड़केगी। लेकिन यह आग सिर्फ दो देशों को नहीं जलाएगी, इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका और दुनिया के सामरिक संतुलन पर पड़ेगा।
ये भी पढ़ें- ODI रैंकिंग से गायब हो गए रोहित-कोहली के नाम, दोनों पिछले हफ्ते टॉप-5 में थे, क्या ICC से फिर हो गई कोई गलती?