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कठुआ में तीन जगह बादल फटा: 7 की मौत, कई घायल; हिमाचल के कुल्लू में भी तबाही

रविवार सुबह जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। यह जम्मू-कश्मीर में तीन दिन के भीतर दूसरी बड़ी आपदा है। कठुआ जिले के बॉर्डर से सटे इलाकों में तीन जगह बादल फटा, वहीं हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मंडी में भी बाढ़ जैसे हालात बन गए।

जम्मू-कश्मीर: कठुआ में तबाही

कठुआ के जोद घाटी इलाके में बादल फटने से सात लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए हैं। इसके अलावा मथरे चक, बगार्ड-चंगड़ा और दिलवान-हुटली में भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।
14 अगस्त को भी किश्तवाड़ जिले के चसोटी में बादल फटने से भारी तबाही हुई थी।

लैंडस्लाइड की वजह से जोद गांव का शहर से संपर्क टूट गया। रेस्क्यू टीम को वहां तक पहुँचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई घरों में पानी और मलबा भर गया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कठुआ के डिप्टी एसपी राजेश शर्मा ने बताया कि दो से तीन मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और छह लोगों के फंसे होने की सूचना है। नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने 17 से 19 अगस्त तक जम्मू-कश्मीर के 11 जिलों—जम्मू, रियासी, उधमपुर, राजौरी, पुंछ, सांबा, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और कश्मीर के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

हिमाचल प्रदेश: कुल्लू और मंडी में फ्लैश फ्लड

हिमाचल में भी रविवार सुबह करीब 4 बजे बादल फटा। कुल्लू के टकोली और शालानाला क्षेत्र में पानी और मलबे से भारी नुकसान हुआ। नगवाई और पनारसा में भी फ्लैश फ्लड आया।

कुल्लू-मंडी हाईवे कई जगहों पर बंद हो गया है। 10 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई गाड़ियां मलबे में दब गईं। शालानाल खड्ड में आई बाढ़ से एक कंपनी की कॉलोनी और ऑफिस की दीवारें टूट गईं।

प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 261 लोगों की जान जा चुकी है। मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है।

किश्तवाड़ में अब तक 65 की मौत

14 अगस्त को किश्तवाड़ के चसोटी गांव में बादल फटने से अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है। 34 शवों की पहचान हो पाई है। 500 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया, जबकि 200 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ की तीन टीमें, सेना के 300 जवान, मेडिकल यूनिट, एसडीआरएफ और पुलिस लगातार लगे हुए हैं। घायलों की संख्या 180 है, जिनमें से 40 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

लोगों का गुस्सा

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शनिवार को चसोटी पहुंचे थे। इस दौरान स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि राहत कार्य धीमी गति से हो रहे हैं। एक युवक ने कहा कि 20 जेसीबी मशीनें मौजूद हैं लेकिन केवल दो ही काम कर रही थीं। जैसे ही नेता पहुंचे, बाकी मशीनों को चालू कर दिया गया।

यह हादसा उस वक्त हुआ जब हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा के लिए चसोटी गांव में रुके हुए थे। श्रद्धालुओं की बसें, टेंट, लंगर और दुकानें सब बाढ़ में बह गए।

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