सना/यरुशलम: इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कथित ‘ग्रेटर इज़रायल’ विज़न को लेकर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और तेज़ होता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में नेतन्याहू द्वारा दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान इस विचारधारा से जुड़ाव की बात कहे जाने के बाद अरब जगत के विभिन्न हिस्सों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
अब यमन के प्रभावशाली हूती आंदोलन ने भी इस मसले पर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इस विचार को मुस्लिम जगत के लिए एक ‘अपमानजनक’ योजना करार दिया है और चेतावनी दी है कि अगर इसे आगे बढ़ाया गया, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
‘ग्रेटर इज़राइल’: एक विवादास्पद विचारधारा
‘ग्रेटर इज़रायल’ की अवधारणा कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह यहूदी दक्षिणपंथी धड़ों के बीच वर्षों से चलता आ रहा एक आदर्श है। इस विचार के अनुसार, इज़रायल का क्षेत्रफल वर्तमान सीमाओं से कहीं अधिक विस्तृत होना चाहिए, जिसमें जॉर्डन, सीरिया, लेबनान, मिस्र, इराक और सऊदी अरब के कुछ हिस्से शामिल हों।
हालांकि, यह विचार आधिकारिक रूप से इज़रायली सरकार की नीतियों का हिस्सा नहीं है, लेकिन नेतन्याहू द्वारा इसे लेकर ‘गहरा जुड़ाव’ महसूस करने की बात कहे जाने के बाद यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया है।
हूती नेता की प्रतिक्रिया: इस्लामी एकता पर हमला
अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख और यमन में हूती गुट के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने अपने टेलीविज़न संबोधन में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिका और इज़रायल पर इस योजना के ज़रिए ‘इस्लामी उम्माह’ यानी वैश्विक मुस्लिम समुदाय को विभाजित करने और अपमानित करने का आरोप लगाया।
हूती नेता ने कहा, “ग्रेटर इज़रायल का प्रचार न केवल राजनीतिक उद्देश्यों को दर्शाता है, बल्कि यह मुस्लिम समाज को तोड़ने और उनकी एकता को कमजोर करने का एक साधन भी है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अरब दुनिया के नेताओं ने इस मुद्दे पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी और उनकी निष्क्रियता मुस्लिम जनता के लिए चिंता का विषय है।
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गाजा संघर्ष और वैश्विक प्रतिक्रिया पर निशाना
अपने संबोधन में अब्दुल मलिक अल-हूती ने गाजा पट्टी में इज़रायली सैन्य कार्रवाइयों की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और नागरिकों पर हमले कर के इज़रायल सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रहा है और वैश्विक मीडिया तक असल तस्वीरें पहुंचने नहीं दे रहा।
हूती नेता ने यह भी कहा कि गाजा में हो रहे घटनाक्रम ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ हैं, और इनकी भयावहता दुनिया के अन्य संघर्षों से कहीं अधिक है। इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर मौन है, जिससे इन कार्रवाइयों को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है।
अरब देशों की आलोचना और बढ़ता असंतोष
बेंजामिन नेतन्याहू के बयान के बाद केवल हूती ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, कतर, जॉर्डन, फिलिस्तीनी अथॉरिटी और अरब लीग जैसे कई प्रभावशाली संगठन और देश भी विरोध में सामने आए हैं। इन देशों ने नेतन्याहू के दृष्टिकोण को अस्वीकार्य बताया है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस विचारधारा को किसी भी रूप में इज़रायल की आधिकारिक नीति में जगह मिलती है, तो यह न केवल फिलिस्तीन मुद्दे को और जटिल बना देगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है।
क्या कहता है राजनीतिक परिप्रेक्ष्य?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘ग्रेटर इज़रायल’ जैसी अवधारणाएं न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक विवादों को हवा देती हैं, बल्कि इनसे क्षेत्रीय संघर्ष और कट्टरता को भी बढ़ावा मिलता है। इस समय जबकि गाजा में युद्ध जैसे हालात हैं और शांति वार्ता ठप पड़ी हुई है, ऐसे में नेतन्याहू का इस विचार से जुड़ाव जताना क्षेत्र में एक नया भूकंप ला सकता है।
कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि नेतन्याहू घरेलू राजनीति में समर्थन बनाए रखने के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं, क्योंकि इज़रायल में भी आंतरिक असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
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