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लाल किले से पीएम मोदी ने दिया दिवाली गिफ्ट, GST घटाने की बात कही, 3.5 करोड़ रोजगार मिलेगा

नई दिल्ली: हर साल जब स्वतंत्रता दिवस आता है, तो पूरे देश की निगाहें लाल किले की प्राचीर से होने वाले प्रधानमंत्री के संबोधन पर टिकी होती हैं। इस बार 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देशवासियों को ऐसा तोहफा दिया, जो करोड़ों आम लोगों के जीवन को सीधे तौर पर छूता है। उनके शब्दों में उम्मीद थी, भरोसा था और भविष्य को लेकर एक नया सपना भी।

प्रधानमंत्री ने दो बड़ी घोषणाएं कीं- पहली, ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ और दूसरी, दिवाली तक GST यानी वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) में बड़ी राहत देने का वादा। आइए जानते हैं कि इन दोनों घोषणाओं का क्या मतलब है और इसका आम आदमी पर क्या असर होगा।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “आज मैं आपके लिए खुशखबरी लेकर आया हूं। हम 1 लाख करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरू कर रहे हैं। इससे साढ़े 3 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलेगा।”

यह योजना देश की सबसे बड़ी रोजगार योजनाओं में से एक मानी जा रही है। इसका उद्देश्य है युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना और देश के हर कोने तक रोजगार के अवसर पहुंचाना। इस योजना के तहत सरकार उद्योगों, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करेगी ताकि युवा केवल नौकरी ढूंढने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले भी बनें।

दिवाली से पहले GST में बड़ी राहत

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी साफ कहा कि इस दिवाली देश के नागरिकों को टैक्स में बड़ी राहत मिलने वाली है। उनके अनुसार, सरकार GST के मौजूदा ढांचे का रिव्यू कर रही है और उसमें नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स लाने की तैयारी कर चुकी है। इसका मतलब है कि टैक्सेशन को और भी सरल बनाया जाएगा, जिससे रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी और लोगों की जेब पर बोझ कम होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि GST को 8 साल हो चुके हैं और अब समय आ गया है कि इसे और ज्यादा व्यावहारिक और जन-सुलभ बनाया जाए।

12% GST स्लैब हो सकता है खत्म

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार 12% GST स्लैब को खत्म करने की योजना बना रही है। इसका मतलब है कि अब टूथपेस्ट, बर्तन, कपड़े, जूते जैसी रोज़ाना इस्तेमाल की जाने वाली चीजें, जो पहले 12% टैक्स के दायरे में थीं, उन्हें 5% टैक्स स्लैब में लाया जा सकता है।

यह फैसला मिडिल क्लास और लोअर-इनकम फैमिली के लिए बड़ी राहत होगा। महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को यह बदलाव दिवाली से पहले एक बड़ी सौगात की तरह मिलेगा।

GST: पिछले 5 सालों में टैक्स कलेक्शन हुआ दोगुना

GST की शुरुआत 1 जुलाई 2017 को हुई थी। यह देश के टैक्स सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव था। उस समय इसे ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के नारे के साथ लागू किया गया था।

आज 8 साल बाद इसके नतीजे साफ नजर आ रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में ग्रॉस GST कलेक्शन 22.08 लाख करोड़ रुपए रहा, जो 2020-21 में केवल 11.37 लाख करोड़ रुपए था। यानी सिर्फ 5 सालों में टैक्स कलेक्शन लगभग दोगुना हो गया है।

महीने दर महीने भी औसत GST कलेक्शन में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 में यह औसत 95 हजार करोड़ था, जो अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए प्रति माह हो गया है।

टैक्सपेयर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा बढ़ी

GST लागू होने के बाद से देश में टैक्स देने वालों की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 2017 में रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स की संख्या 65 लाख थी, जो अब 1.51 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

इससे यह साफ है कि देश का टैक्स बेस मजबूत हुआ है और टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ी है, जिससे सरकार को विकास के कामों के लिए ज्यादा संसाधन मिल रहे हैं।

GST से कैसे बदला टैक्स सिस्टम?

GST के लागू होने से पहले देश में VAT, सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, परचेज टैक्स जैसे दर्जनों अलग-अलग टैक्स लागू थे। GST ने इन सभी को एक छतरी के नीचे लाकर टैक्स सिस्टम को पारदर्शी और सरल बना दिया।

GST को 4 हिस्सों में बांटा गया है:

  • CGST (केंद्रीय जीएसटी): केंद्र सरकार के हिस्से का टैक्स
  • SGST (राज्य जीएसटी): राज्य सरकारों के हिस्से का टैक्स
  • IGST (एकीकृत जीएसटी): जब सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा जाता है
  • सेस/उपकर: कुछ विशेष वस्तुओं पर अतिरिक्त टैक्स (जैसे तंबाकू, लग्जरी आइटम्स)

मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है जीएसटी कलेक्शन

KPMG के नेशनल हेड अभिषेक जैन के अनुसार, अब तक का सबसे अधिक GST कलेक्शन देश की मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का संकेत देता है। जब टैक्स कलेक्शन बढ़ता है, तो इसका मतलब होता है कि बाजार में खरीदारी हो रही है, उद्योग चल रहे हैं और लोग नियमों का पालन कर रहे हैं।

अप्रैल के महीने में विशेष रूप से कलेक्शन ज्यादा होता है क्योंकि कंपनियां मार्च क्लोजिंग के बाद अपनी टैक्स देनदारी क्लियर करती हैं। लेकिन पूरे साल के औसत में भी इतनी तेजी, देश की आर्थिक सेहत की पुष्टि करती है।

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