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अमेरिका पहुंचते शेर बना पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर, कश्मीर को बताया गले की नस

टेक्सास: जब इतिहास बार-बार दोहराया जाए, तो उसका मतलब होता है कि कुछ लोग न तो अतीत से सीखते हैं, और न ही वर्तमान की सच्चाई को स्वीकार करते हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर एक बार फिर ऐसे ही प्रयास में जुटे हैं। अपने अमेरिका दौरे पर उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की “गले की नस” बताते हुए वही पुरानी बातें दोहराईं, जो दशकों से पाकिस्तान की कूटनीति और राजनीति की रीढ़ बनी हुई हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या अब दुनिया इस पुराने राग को गंभीरता से लेती है?

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, जनरल मुनीर पिछले दिनों अमेरिका के टैम्पा शहर पहुंचे, जहां उन्होंने प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए कश्मीर को फिर “गले की नस” बताया। इससे पहले अप्रैल में भी वे ऐसा ही बयान दे चुके हैं, लेकिन इस बार यह बात उन्होंने अमेरिकी धरती से कहकर एक नया कूटनीतिक संकेत देने की कोशिश की है।

मुनीर ने स्पष्ट रूप से कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि यह एक “अधूरा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा” है, जो संयुक्त राष्ट्र में लंबित है। उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान इसका लगातार समर्थन करता रहेगा।

भारत पर अस्थिरता फैलाने का आरोप

जनरल मुनीर ने अपने संबोधन में भारत पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि भारत इस क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी चेताया कि अगर किसी भी पक्ष से कोई चूक हुई, तो यह एक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती है।

उन्होंने भारत की खुफिया एजेंसी R&AW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) पर भी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया, जो कूटनीतिक रूप से एक बहुत गंभीर आरोप माना जा सकता है। हालांकि, भारत की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मुनीर की डेढ़ महीने में दूसरी बार अमेरिका यात्रा

जनरल मुनीर की यह डेढ़ महीने में दूसरी अमेरिका यात्रा है। इससे यह साफ हो जाता है कि पाकिस्तान अमेरिकी प्रशासन के साथ अपने संबंधों को नया आयाम देने की कोशिश कर रहा है, विशेषकर जब देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है।

उन्होंने इस दौरे में अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला की प्रशंसा की। साथ ही, नए कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को शुभकामनाएं देते हुए अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों से मुलाकातें भी कीं।

इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन से भी मुलाकात की और उन्हें पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया।

ट्रम्प को फिर याद किया, सीजफायर का श्रेय दिया

अपने भाषण में जनरल मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनकी रणनीति की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टल सका।

यह एक दिलचस्प राजनीतिक संदेश है कि मुनीर अमेरिका के पुराने नेतृत्व को आज के कूटनीतिक परिदृश्य में फिर से प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि ट्रम्प का पाकिस्तान के साथ रिश्ता कई बार उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।

प्रवासी पाकिस्तानियों से ‘निवेश’ की अपील

अपने संबोधन में जनरल मुनीर ने प्रवासी पाकिस्तानियों को “देश का गौरव” बताया और उनके विदेश जाने को “प्रतिभा पलायन” नहीं बल्कि “प्रतिभा हासिल करने” की प्रक्रिया बताया।

उन्होंने कहा कि विदेशों में बसे पाकिस्तानी भी अपने देश के लिए उतने ही समर्पित हैं, जितना कि देश के भीतर रहने वाले लोग। मुनीर ने प्रवासी पाकिस्तानियों से पाकिस्तान में निवेश बढ़ाने और आर्थिक विकास में भागीदारी करने की भी अपील की।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई और चीन जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते हो रहे हैं, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संजीवनी देंगे।

कश्मीर की वही पुरानी कहानी?

कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नीति वर्षों से बदली नहीं है, चाहे सरकार बदली हो या सेनाध्यक्ष। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत ने कश्मीर को पूरी तरह अपने संविधान और कानून के तहत नियंत्रित किया है, और वहां का प्रशासन अब विकास, निवेश और स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

जनरल मुनीर जैसे नेताओं के बयान न सिर्फ दो देशों के रिश्तों को और पेचीदा बनाते हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति के प्रयासों पर भी सवाल खड़े करते हैं। कश्मीर को “गले की नस” कहना अब शायद पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और सैन्य अस्तित्व का सवाल बन चुका है, लेकिन यह बयानबाज़ी किसी समाधान की दिशा में नहीं ले जाती।

क्या अमेरिका इस बयान से प्रभावित होगा?

मुनीर का अमेरिका में बार-बार जाना, वहां के सैन्य नेतृत्व से मिलना और कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख को दोहराना एक साफ़ संकेत है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने पुराने रणनीतिक रिश्ते को पुनर्जीवित करना चाहता है।

हालांकि, अमेरिका अब दक्षिण एशिया की राजनीति को पहले की तरह सिर्फ पाकिस्तान के चश्मे से नहीं देखता। भारत अब अमेरिका का अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। इसलिए मुनीर की इस बयानबाज़ी का वास्तविक असर कितना होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

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Shreeom Singh

Shreeom Singh is a Digital Journalist with over 3 years of experience in the media industry. Having worked with prestigious organizations like Bharat 24, Network 10, and APN News. Shreeom specializes in a wide spectrum of beats, including World, Sports, Business, Lifestyle, and Health. He is dedicated to delivering well-researched and engaging stories to a global audience.

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