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ट्रंप की धमकी से डरे 100 से ज्यादा देश, लेकिन नहीं झुके चीन, भारत जैसे कुछ ताकतवर राष्ट्र, कैसे करेंगे मुकाबला?

वॉशिंगटन डीसी: कल्पना कीजिए, दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति एक दिन संसद में खड़ा होकर कहता है, “अब हम उन सभी देशों पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाएंगे जो हमारे सामान पर टैक्स लगाते हैं!” यह धमकी हवा में नहीं थी, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान आधिकारिक रूप से संसद के जॉइंट सेशन में किया।

इस ऐलान के बाद हड़कंप मच गया। करीब 100 से ज्यादा देशों ने घुटने टेक दिए और अमेरिका से व्यापार समझौता कर लिया। लेकिन भारत समेत पांच देश ऐसे रहे जिन्होंने न दबाव में झुके, न टैरिफ की धमकी से डरे।

टैरिफ की तलवार और ट्रंप का अल्टीमेटम

2 अप्रैल को ट्रंप ने भारत समेत 69 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। 9 अप्रैल से यह लागू होना था, लेकिन फिर उन्होंने देशों को 90 दिन का समय दिया—समझौता करो, वरना भुगतो। 31 जुलाई को यह डेडलाइन खत्म हुई और उसके बाद 100 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लागू कर दिया गया। जिन देशों ने समझौता किया उन पर 10 से 20% टैरिफ लगा, जबकि जो नहीं माने, उन पर 25 से 50% का भारी टैक्स लगा।

भारत पर सीधे 25% टैरिफ लागू कर दिया गया क्योंकि भारत ने ट्रंप की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।

क्यों झुके बाकी देश?

ब्रिटेन, जापान, यूरोपीय यूनियन, साउथ कोरिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने अमेरिका के सामने कई रियायतें दीं।

ब्रिटेन ने अमेरिका से बीफ और शराब जैसे उत्पादों पर टैक्स फ्री एंट्री दी। जापान ने अमेरिका से 100 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। EU ने भारी निवेश और एनर्जी खरीदने की बात की। साउथ कोरिया ने भी अमेरिका से अरबों डॉलर की एनर्जी खरीदने का वादा किया और इंडोनेशिया ने 50 विमान खरीदने की घोषणा की।

इन देशों को डर था कि अमेरिका से पंगा लिया तो अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी। इसलिए उन्होंने टैरिफ घटवाने के लिए अमेरिका को वो सबकुछ दिया जो वह चाहता था।

भारत ने क्यों नहीं मानी ट्रंप की शर्तें?

भारत और अमेरिका के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन ट्रंप की एक शर्त भारत को मंजूर नहीं थी- मांसाहारी गाय के दूध को भारत में बेचने की अनुमति।

भारत न केवल धार्मिक भावनाओं, बल्कि अपने किसानों और डेयरी उद्योग की रक्षा के लिए इस पर समझौता नहीं कर सका। साथ ही ट्रंप की यह भी मांग थी कि भारत अमेरिका के छोटे और मझोले उद्योगों के लिए बाजार खोले। भारत ने यह मानते हुए इनकार किया कि ऐसा करना अपने MSME सेक्टर को खत्म करने जैसा होगा।

ट्रंप ने नाराज होकर यह भी कहा कि भारत रूस से हथियार और तेल खरीद रहा है, इसलिए उस पर और भी पेनल्टी लगाई जाएगी।

चीन और अमेरिका की ट्रेड वॉर

चीन और अमेरिका की ट्रेड वॉर सबसे ज्यादा चर्चा में रही। ट्रंप ने चीन पर 145% तक टैरिफ लगाया, जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 125% का भारी टैरिफ लगा दिया। मामला कुछ थमा, लेकिन फिर भी दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अब भी भारी टैक्स लगा रखा है।

ट्रंप चाहते थे कि चीन अपनी सरकारी कंपनियों को सब्सिडी देना बंद करे, विदेशी कंपनियों को टेक्नोलॉजी सेक्टर में मौका दे और बौद्धिक संपत्ति कानूनों में बदलाव करे। चीन ने इसे सीधे तौर पर अपनी संप्रभुता में दखल बताया और झुकने से इनकार कर दिया।

ब्राजील, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका क्यों नहीं झुके?

ब्राजील पर अमेरिका ने सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया। वजह साफ थी अमेरिका को वहां की सरकार से नाराजगी थी और व्यापार घाटा बहुत ज्यादा था।

कनाडा ने फिलिस्तीन को समर्थन दिया और ट्रंप के नजरों में चढ़ गया। नतीजा—10% टैरिफ और बढ़ा दिया गया। इसके अलावा ट्रंप ने कनाडा पर फेंटेनाइल ड्रग्स की आपूर्ति रोकने में नाकामी का भी आरोप लगाया।

दक्षिण अफ्रीका की गलती बस इतनी थी कि वह चीन, रूस और ईरान से दोस्ती निभा रहा था। ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बनाया और टैरिफ नहीं घटाया।

नए बाजारों की तलाश कर रहे

भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और चीन जैसे देश अब अमेरिका पर निर्भर न रहकर नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं।

भारत और ब्राजील अपने घरेलू उद्योगों को राहत पैकेज दे रहे हैं ताकि अमेरिकी टैरिफ का असर कम किया जा सके। चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने WTO में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। भारत भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है।

ये देश अब आत्मनिर्भरता की राह पर चल रहे हैं। वे अमेरिका को दिखाना चाहते हैं कि व्यापार सम्मान के साथ होता है, दबाव में नहीं।

क्या ये सिर्फ व्यापार की बात है?

अगर गहराई से देखें तो यह सिर्फ व्यापार नहीं, एक तरह की कूटनीतिक रणनीति है। ट्रंप अपने चुनावी एजेंडे, घरेलू राजनीति और अमेरिका फर्स्ट की नीति को आगे बढ़ाने के लिए दुनियाभर पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन भारत जैसे देश यह दिखा रहे हैं कि सम्मान के साथ व्यापार करना ज्यादा जरूरी है, चाहे इसके लिए थोड़ी कीमत ही क्यों न चुकानी पड़े।

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Shreeom Singh

Shreeom Singh is a Digital Journalist with over 3 years of experience in the media industry. Having worked with prestigious organizations like Bharat 24, Network 10, and APN News. Shreeom specializes in a wide spectrum of beats, including World, Sports, Business, Lifestyle, and Health. He is dedicated to delivering well-researched and engaging stories to a global audience.

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