‘मुझे कुछ नहीं पता…’ अमेरिका के डबल स्टैंडर्ड पर ट्रंप की बोलती बंद, भारत के दावों का नहीं है जवाब, देखें Video

Donald Trump India Tariff Controversy
Donald Trump India Tariff Controversy

वॉशिंगटन: दुनिया में जब दो बड़े देशों के बीच व्यापार और राजनीति टकराते हैं, तो उसका असर केवल उन देशों तक ही सीमित नहीं रहता। आम लोगों की ज़िंदगी, तेल की कीमतें और वैश्विक रिश्तों की तस्वीर भी बदल जाती है। हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच चल रहे इस तनाव का एक ऐसा ही किस्सा सामने आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। इस बार केंद्र में हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका रूस को लेकर दोहरा रवैया।

ट्रंप से पूछा गया सवाल और छा गई खामोशी

वॉशिंगटन में उस वक्त अजीब सा माहौल बन गया जब एक पत्रकार ने डोनाल्ड ट्रंप से एक सीधा और जरूरी सवाल पूछ लिया। सवाल था- जब अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहा है, तो वह भारत पर क्यों दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल और अन्य सामान खरीदना बंद करे?

ट्रंप इस सवाल पर चुप हो गए। उनका जवाब था- “मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है, मुझे इसकी जांच करनी होगी।” ये जवाब एक ऐसे व्यक्ति से आया है, जो हमेशा दुनिया को नैतिकता और सिद्धांतों की सीख देता रहा है। भारत ने अमेरिका के इस रवैये को ‘पाखंड’ (Hypocrisy) कहा है और बिल्कुल सही कहा।

खुद व्यापार करें और हमें रोकें, ये कहां का न्याय है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप और अमेरिकी सरकार के रवैये पर तीखी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने साफ कहा कि अमेरिका रूस से लगातार यूरेनियम, उर्वरक और पैलेडियम जैसी सामग्रियां खरीद रहा है वो भी ऐसे समय में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है। इसके बावजूद अमेरिका भारत को चेतावनी देता है कि वह रूस से तेल और गैस की खरीदारी बंद करे।

भारत ने इसे ‘अनुचित और अतार्किक’ बताया। विदेश मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने खुद भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए रूस से खरीदारी करने की सलाह दी थी।

रूस से तेल खरीद पर क्यों भड़के ट्रंप?

ट्रंप ने हाल ही में भारत को धमकी दी कि अगर वह रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो अमेरिका भारत पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाएगा। ट्रंप का कहना है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे ओपन मार्केट में बेच रहा है, जिससे रूस को आर्थिक फायदा हो रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि इससे यूक्रेन में लोगों की मौतें हो रही हैं और भारत को इसकी कोई परवाह नहीं।

लेकिन सच्चाई यह है कि भारत जो भी तेल रूस से खरीदता है, वह अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए करता है। युद्ध से पहले भारत रूस से महज 0.2% तेल खरीदता था, जो अब बढ़कर लगभग 17.8 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

अमेरिका खुद व्यापार करता है, दूसरों को रोकता है

रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां अब भी रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, उर्वरक, रसायन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी धातुएं खरीद रही हैं। यानी खुद तो अमेरिका रूस से व्यापार करता है लेकिन भारत को इसके लिए दोषी ठहराता है।

यह दोहरा रवैया न केवल भारत बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण (Global South) के लिए चिंता का विषय बन गया है। आखिर क्यों एक देश को ये अधिकार हो कि वो तय करे कौन क्या खरीदे और किससे खरीदे?

भारत-रूस संबंध: डोभाल की मॉस्को यात्रा

इन सबके बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे हैं। यह दौरा पहले से तय था, लेकिन मौजूदा हालात में इसका महत्व और बढ़ गया है। सूत्रों की मानें तो इसी महीने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी रूस का दौरा कर सकते हैं। भारत रूस के साथ अपने रिश्तों को और गहरा करना चाहता है—खासतौर पर ऐसे समय में जब पश्चिमी देश उस पर दबाव बना रहे हैं।

रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश भारत

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और रूस के बीच व्यापार में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां भारत रूस से बेहद कम तेल खरीदता था, आज वह चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। भारत को यह तेल छूट में मिलता है और भारतीय कंपनियां इसे रिफाइन करके न सिर्फ घरेलू ज़रूरतें पूरी करती हैं बल्कि उसे यूरोप समेत कई देशों को बेचकर करोड़ों का मुनाफा भी कमाती हैं।

इससे न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा होता है, बल्कि आम लोगों को भी महंगे तेल से राहत मिलती है।

ये भी पढ़ें- किसी को जांघ तो किसी को होंठ पसंद, रेप से लेकर नाजायज बच्चों तक… पढ़ें US राष्ट्रपतियों का गंदा इतिहास

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *